Mohan Bhagwat Statement Row: ‘मुस्लिम नहीं होने चाहिए तो हिंदू नहीं’, भागवत के बयान पर राशिद अल्वी का तीखा वार

मोहन भागवत के अमेरिका में हिंदू-मुस्लिम एकता को लेकर दिए बयान पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सवाल उठाए हैं। अल्वी ने पूछा कि अगर भारत में दोनों समुदायों के बीच कोई समस्या नहीं है तो अमेरिका में जाकर इस मुद्दे पर बोलने की जरूरत क्यों पड़ी। वहीं, कई मुस्लिम नेताओं ने भागवत के बयान का स्वागत किया।

Mohan Bhagwat Statement Row

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 30, 2026

Mohan Bhagwat Statement Row: RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए हिंदू-मुस्लिम एकता से जुड़े बयान पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सवाल खड़े किए हैं। रविवार को प्रतिक्रिया देते हुए राशिद अल्वी ने पूछा कि अगर भारत में हिंदू और मुसलमानों के बीच कोई समस्या नहीं है, तो इस मुद्दे पर अमेरिका में जाकर बयान देने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि विदेश में इस तरह की बात किए जाने से यह संकेत मिलता है कि देश में कोई समस्या मौजूद है।

राशिद अल्वी बोले- भारत में सब ठीक है तो अमेरिका जाकर क्यों दिया बयान?

न्यूयॉर्क में आयोजित ‘One World One Humanity’ कार्यक्रम में मोहन भागवत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए राशिद अल्वी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस मुद्दे को उठाने के लिए अमेरिका जाने की जरूरत क्यों महसूस हुई। उन्होंने कहा कि यदि भारत में दोनों समुदायों के बीच कोई परेशानी नहीं है, तो अचानक विदेश में जाकर हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर बात करने का कोई कारण नहीं होना चाहिए।

मोहन भागवत ने कहा- मुस्लिमों के खिलाफ सोच रखने वाला हिंदू नहीं रह सकता

दरअसल, शनिवार को न्यूयॉर्क के कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। उन्होंने हिंदू दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं और हर इंसान की अपनी गरिमा होती है। भागवत ने इंसानों के बीच भेदभाव की सोच को भी खारिज किया।

RSS और मुस्लिमों को लेकर राशिद अल्वी का तीखा हमला

आपको बता दे कि, मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राशिद अल्वी ने RSS के दृष्टिकोण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सवाल किया कि क्या RSS प्रमुख को भारत में मुस्लिमों को लेकर राजनीतिक नेताओं की ओर से दिए जाने वाले बयानों की जानकारी नहीं है। अल्वी ने आरोप लगाया कि RSS का नजरिया मुस्लिम विरोधी रहा है और कहा कि संगठन की गतिविधियों में उन्हें उसका यही दृष्टिकोण दिखाई देता है।

मोहन भागवत के बयान का मुस्लिम नेताओं ने किया स्वागत

जहां कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भागवत के बयान पर सवाल उठाए, वहीं कई मुस्लिम नेताओं ने RSS प्रमुख की टिप्पणी का सकारात्मक तरीके से स्वागत किया। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना यासूब अब्बास ने भागवत के बयान को सराहनीय बताया। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम समुदायों को भारत की ‘दो आंखें’ बताते हुए कहा कि देश की खूबसूरती और मजबूती दोनों समुदायों के साथ रहने से है।

यासूब अब्बास बोले- हिंदू-मुस्लिम देश की दो आंखें

यासूब अब्बास ने कहा कि जो हिंदू मुसलमानों से नफरत करता है, वह वास्तव में हिंदू धर्म की मूल भावना को नहीं समझता। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान देश की दो आंखों की तरह हैं और दोनों के सुरक्षित रहने से ही देश का चेहरा बेहतर दिखाई देता है। उन्होंने मोहन भागवत के बयान को भाईचारे और सद्भाव की दिशा में सकारात्मक संदेश बताया।

मौलाना खालिद रशीद ने कहा- मोहन भागवत की बात जमीन पर भी दिखनी चाहिए

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एग्जीक्यूटिव मेंबर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी मोहन भागवत के बयान को सकारात्मक बताया। हालांकि उन्होंने कहा कि केवल बयान देने से बदलाव नहीं आएगा। इस संदेश को देश के जमीनी स्तर पर लागू करना भी जरूरी है। उनके मुताबिक, अगर ऐसा होता है, तभी इस बयान को वास्तविक रूप से सकारात्मक पहल माना जा सकेगा।

इकबाल अंसारी ने मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम बयान का किया समर्थन

बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने भी भागवत की टिप्पणी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भाईचारे और आपसी प्रेम की धरती है। उनके मुताबिक, देश को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो दोनों समुदायों को साथ लेकर चले और विकास, रोजगार तथा देश की तरक्की को प्राथमिकता दे।

मोहन भागवत के बयान पर गरमाई सियासत

मोहन भागवत के अमेरिका में दिए बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ राशिद अल्वी ने RSS और भागवत के बयान को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं कई मुस्लिम नेताओं ने इसे हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव की दिशा में सकारात्मक संदेश बताया है। ऐसे में भागवत की टिप्पणी पर सियासी बहस फिलहाल जारी है।