LPG Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरुमध्य में जापान,ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन से मदद की गुहार पर तीनों देशों ने कहा कि,होर्मुज जलडमरुमध्य की सुरक्षा में मदद के लिए अपने जहाज भेजने की उनकी कोई योजना नहीं है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इस संबंध में अपने मित्र देशों से सहायता प्रदान करने के दबाव के बीच यह बयान आया है।
जापान,ऑस्ट्रेलिया,ब्रिटेन से अमेरिका ने मांगी मदद
जापान के प्रधानमंत्री सनाए ताकाईची ने कहा है कि,होर्मुज में उनकी फिलहाल नौसेना जहाज तैनात करने की कोई योजना नहीं है।ऑस्ट्रेलिया की मंत्री कैथरीन किंग ने कहा कि,वह कोई जहाज तैनात नहीं करेगा और इसे लेकर उन्हें कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है।दक्षिण कोरिया ने कहा कि,वह इस मुद्दे पर अमेरिका से बात कर रहा है लेकिन कोई भी संभावित कदम सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद ही उठाया जाएगा।
तीनों देशों ने मदद से किया इनकार
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से चर्चा की।ब्रिटेन पीएम ने पश्चिमी देशों की इसको लेकर प्रतिक्रिया पर समन्वय के लिए कनाडा के मार्क कार्नी से भी बातचीत की।
युद्ध के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता

वहीं भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर एलपीजी से भरा जहाज Shivalik LPG Carrier Ship आज भारत के मुंद्रा पोर्ट पहुंचने वाला है। यह जहाज बड़ी मात्रा में एलपीजी सिलेंडर लेकर भारत आ रहा है, जो देश की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।जबकि Nanda Devi LPG Carrier Ship के मंगलवार को कांडला पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है।दोनों जहाज Strait of Hormuz पार कर चुके हैं और इनमें कुल करीब 92,712 मीट्रिक टन LPG लदी है।
92,712 मीट्रिक टन LPG जल्द भारत पहुंचने की उम्मीद
जानकारी के अनुसार, जहाज में बड़ी मात्रा में एलपीजी लदी हुई है और इसे सुरक्षित रूप से भारत लाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयास किए गए थे।इसी कड़ी में एक और भारतीय जहाज Nanda Devi LPG Carrier Ship के भी मंगलवार को भारत के कांडला पोर्ट पर पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। दोनों जहाज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz को पार कर चुके हैं। इन जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन जहाजों का सुरक्षित भारत पहुंचना देश की ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने के साथ-साथ सरकार की कूटनीतिक सक्रियता को भी दर्शाता है।










