Modi Cabinet Reshuffle : Narendra Modi कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज, Dharmendra Pradhan समेत मंत्रियों पर चर्चा जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में बड़े कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालयों के प्रदर्शन और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, जबकि नए चेहरों को भी जगह मिल सकती है। आखिर इस बदलाव के पीछे क्या रणनीति है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Modi Cabinet Reshuffle

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 28, 2026

Modi Cabinet Reshuffle : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में जल्द ही व्यापक फेरबदल और विस्तार देखने को मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले मोदी मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) का शीर्ष नेतृत्व अब फेरबदल की रूपरेखा को अंतिम रूप दे चुका है। यह बदलाव पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में संगठन की नई टीम की घोषणा के साथ ही संपन्न होगा। संगठन में युवाओं को प्रमुख पदों पर जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी है, ताकि 2029 के मिशन और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को अधिक सक्रिय और धारदार बनाया जा सके।

मंत्रियों और संगठनात्मक भूमिकाओं में अदला-बदली

बीजेपी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि पार्टी की रणनीति ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत को सख्ती से लागू करने की है। इसके तहत, सरकार में शामिल कुछ मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जबकि संगठन के अनुभवी पदाधिकारियों को मोदी मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी। पिछले सप्ताह भाजपा अध्यक्ष ने कई केंद्रीय राज्य मंत्रियों के साथ मंत्रणा की थी, जो इस फेरबदल की पूर्वपीठिका मानी जा रही है। वहीं, कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग में परिवर्तन की संभावना भी बनी हुई है। इस प्रक्रिया में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और राजनीतिक निष्ठाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि मंत्रिमंडल और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जा सके।

धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा मंत्रालय पर टिकी निगाहें

मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस गहरा गया है। हाल के दिनों में नीट (NEET) पेपर लीक मामला और सीबीएसई (CBSE) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में कथित अनियमितताओं जैसे विवादों ने शिक्षा मंत्रालय को घेरे में खड़ा किया है। इन विवादों के कारण मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं, जिसके बाद प्रधान के पद को लेकर विभिन्न अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों का मानना है कि फेरबदल की स्थिति में शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव संभव है, हालांकि अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री के विवेक पर निर्भर करेगा।

कूटनीतिक व्यस्तता और फेरबदल का संभावित समय

प्रधानमंत्री मोदी का आगामी कार्यक्रम काफी व्यस्त है, जिसे देखते हुए कैबिनेट विस्तार का समय अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। पीएम मोदी सेशेल्स की आधिकारिक यात्रा पर हैं, जिसके बाद उनका इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा प्रस्तावित है। साथ ही, जुलाई के पहले सप्ताह में जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की दिल्ली यात्रा का भी कार्यक्रम है। इन सभी व्यस्तताओं को देखते हुए फेरबदल जुलाई के मध्य में, यानी मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले होने के प्रबल संकेत हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की हालिया मुलाकात ने इन अटकलों को और अधिक बल प्रदान किया है।

चुनावी राज्यों और नए सहयोगियों पर फोकस

आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों के प्रतिनिधियों को मंत्रिपरिषद में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की पूरी उम्मीद है। वहीं, पश्चिम बंगाल में भाजपा की हालिया सफलता को देखते हुए वहां के कुछ सांसदों को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है। इसके अलावा, शिवसेना (शिंदे गुट), और अन्य सहयोगी दलों के साथ-साथ ‘आप’ से आए राज्यसभा सदस्यों को भी मंत्री पद का तोहफा मिल सकता है। हालांकि, दलबदल विरोधी कानून और लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय का पेंच भी इन नियुक्तियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संगठन में बड़े बदलाव और राज्यपालों की नियुक्तियां

कैबिनेट फेरबदल के साथ ही कई महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। केंद्रीय मंत्रियों पंकज चौधरी, हर्ष मल्होत्रा, जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नेताओं की भूमिकाओं में बदलाव लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के राज्यपालों का कार्यकाल भी जल्द ही समाप्त होने वाला है, जिसे देखते हुए सरकार से हटाए जाने वाले कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को राजभवनों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। प्रधानमंत्री मोदी का कार्य करने का अपना अनूठा तरीका है—वे बड़े फैसलों को अंतिम समय तक पूरी तरह गोपनीय रखते हैं। ऐसे में अंतिम घोषणा होने तक सभी कयास केवल अनुमानों तक ही सीमित हैं।

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