Modi Cabinet Decisions : मोदी कैबिनेट ने सेमिकॉन 2.0 मंजूर, काशी को मिले दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर

मोदी कैबिनेट ने Semicon 2.0 योजना को मंजूरी दे दी है, वहीं काशी के लिए दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर को हरी झंडी मिली है। इन फैसलों को देश की तकनीकी क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। अब नजर इनके क्रियान्वयन और संभावित असर पर है।

Modi Cabinet Decisions

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 15, 2026

Modi Cabinet Decisions : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के भविष्य को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण इकोसिस्टम को दुनिया में अग्रणी बनाने के उद्देश्य से ‘सेमिकॉन 2.0’ कार्यक्रम को मंजूरी दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार ने 1,27,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट निर्धारित किया है। यह निर्णय न केवल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को भी और अधिक मजबूत बनाएगा।

आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है सेमीकंडक्टर

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन निर्णयों की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि सेमीकंडक्टर आज की आधुनिक अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण बुनियाद है। हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले मोबाइल फोन, कैमरा, रेफ्रिजरेटर, टीवी, एयर कंडीशनर से लेकर आधुनिक वाहनों, रेल प्रणाली और यहां तक कि रक्षा उपकरणों एवं मिसाइलों तक, लगभग हर आधुनिक तकनीक का संचालन सेमीकंडक्टर चिप्स पर निर्भर है। उन्होंने जोर दिया कि इलेक्ट्रॉनिक्स अब केवल एक उपभोक्ता वस्तु नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र और रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में स्थापित हो चुका है। सरकार की यह पहल अब पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन को कवर करेगी।

सिलिकॉन से चिप तक की जटिल प्रक्रिया

मंत्री वैष्णव ने सेमीकंडक्टर निर्माण की तकनीकी बारीकियों को समझाते हुए बताया कि यह प्रक्रिया सिलिकॉन इन्गॉट से शुरू होकर वेफर निर्माण और उसके बाद अंतिम फैब्रिकेशन तक जाती है। इसमें अत्यंत सूक्ष्म और जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है। इसकी जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि किसी व्यक्ति से अपने नाखून पर नाम लिखने को कहा जाए तो यह संभव है, लेकिन उसी नाखून पर पूरी रामायण या महाभारत लिखने जैसी अत्यधिक सूक्ष्मता और सटीकता सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन में अनिवार्य होती है। इतनी सटीकता के साथ चिप बनाना भारत के इंजीनियरिंग कौशल के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

काशी के लिए आधारभूत ढांचे का नया युग

सेमीकंडक्टर मिशन के साथ-साथ सरकार ने सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी (काशी) के विकास के लिए भी एक बड़ी सौगात दी है। वर्तमान में काशी में प्रतिवर्ष लगभग 15 करोड़ पर्यटक पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों का आगमन और शहर का तेजी से बढ़ता यातायात दबाव एक आधुनिक परिवहन अवसंरचना की मांग कर रहा था। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने शहर में यातायात जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए दो विशाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जो काशी की कायापलट करने के लिए तैयार हैं।

वरुणा एक्सप्रेसवे: 43 किलोमीटर का नया सफर

वाराणसी की पहली बड़ी परियोजना ‘वरुणा एक्सप्रेसवे’ है, जो वरुणा नदी के किनारे विकसित की जाएगी। यह 43 किलोमीटर लंबा छह और चार लेन का एक आधुनिक एलिवेटेड कॉरिडोर होगा। इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना पर अनुमानित 10,998 करोड़ रुपये की लागत आएगी और सरकार ने इसे लगभग चार वर्षों की समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह गलियारा शहर के भीतर यातायात को सुव्यवस्थित करने में गेम-चेंजर साबित होगा।

गंगा तट पर बनेगा आधुनिक सिग्नेचर ब्रिज

वाराणसी की दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण परियोजना गंगा नदी के समानांतर बनने वाला 46 किलोमीटर लंबा छह लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर है। यह कॉरिडोर आईआईटी-बीएचयू, लंका चौराहा और रामनगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका सिग्नेचर केबल-स्टे ब्रिज होगा, जो न केवल तकनीकी इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना होगा, बल्कि शहर की सुंदरता में भी चार चांद लगाएगा। इस परियोजना पर 14,448 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

बेहतर कनेक्टिविटी से बदलेगी काशी की तस्वीर

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत वाले छह लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर समेत इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद वाराणसी में यातायात जाम की समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा। इन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से काशी की कनेक्टिविटी को नया आयाम मिलेगा, जिससे पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को विश्वस्तरीय अनुभव प्राप्त होगा। यह कदम स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार एक तरफ भविष्य की तकनीक (सेमीकंडक्टर) पर ध्यान केंद्रित कर रही है, तो दूसरी तरफ देश की सांस्कृतिक धरोहरों को आधुनिक विश्व के साथ जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

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