Kolathur Seat Result 2026 : सीएम एमके स्टालिन कोलाथुर से हारे, पुराने साथी वी.एस. बाबू ने दी मात

तमिलनाडु की सियासत में आज वह हुआ जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। कोलाथुर सीट से लगातार जीतते आ रहे मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को उनके ही पूर्व सहयोगी और TVK उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने भारी मतों से हरा दिया है। इस हार ने न केवल डीएमके बल्कि पूरे देश को चौंका दिया है।

Kolathur Seat Result 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 4, 2026

Kolathur Seat Result 2026 :  तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भारतीय राजनीति में एक ऐसा भूचाल ला दिया है जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। राज्य की राजनीति के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक और मौजूदा मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को अपनी ही पारंपरिक सीट कोलाथुर से हार का स्वाद चखना पड़ा है। इस हार ने न केवल द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) के कार्यकर्ताओं को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत भी दे दिया है। अभिनेता से नेता बने विजय ‘थलपति’ की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने इस जीत के साथ यह साबित कर दिया है कि वह अब राज्य में एक निर्णायक शक्ति बन चुकी है।

कोलाथुर का ‘अभेद्य’ किला ढहा: स्टालिन के हाथ से फिसली सत्ता

कोलाथुर विधानसभा सीट को मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता था। साल 2011 में इस सीट के गठन के बाद से ही स्टालिन यहाँ से लगातार तीन बार (2011, 2016 और 2021) चुनाव जीत चुके थे। उनके लिए यह सीट केवल एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रतीक थी। हालाँकि, 2026 के चुनावी समर में जनता का मूड बदला हुआ नजर आया। एंटी-इन्कंबैंसी और टीवीके के बढ़ते प्रभाव ने स्टालिन के इस ‘अभेद्य’ किले की दीवारों को कमजोर कर दिया। मतगणना के अंतिम दौर तक चले रोमांचक मुकाबले में स्टालिन को शिकस्त का सामना करना पड़ा, जिसने पूरे देश के राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है।

अपनों से मिली मात: वी.एस. बाबू ने स्टालिन को दी कड़ी पटखनी

स्टालिन की इस ऐतिहासिक हार की पटकथा किसी और ने नहीं, बल्कि उनके एक पुराने साथी वी.एस. बाबू ने लिखी है। वी.एस. बाबू कभी डीएमके के कद्दावर नेता और स्टालिन के बेहद करीबी माने जाते थे। विडंबना यह है कि साल 2011 के विधानसभा चुनाव में, जब स्टालिन पहली बार कोलाथुर से खड़े हुए थे, तब वी.एस. बाबू ही उनके चुनाव प्रभारी (इंचार्ज) थे। उन्होंने ही कोलाथुर में स्टालिन की जीत की जमीन तैयार की थी। लेकिन समय का पहिया ऐसा घूमा कि वही बाबू आज स्टालिन के पतन का कारण बने। टीवीके के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए बाबू ने न केवल स्टालिन को चुनौती दी, बल्कि उन्हें चुनावी मैदान में धूल भी चटा दी।

वी.एस. बाबू का सफर: डीएमके से एआईएडीएमके और फिर टीवीके का साथ

वी.एस. बाबू का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पूर्व में डीएमके विधायक रह चुके बाबू ने वैचारिक मतभेदों और पार्टी के भीतर अपनी उपेक्षा के चलते डीएमके छोड़ दी थी। इसके बाद वे अन्नाद्रमुक (AIADMK) में शामिल हो गए थे। लेकिन उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को असली उड़ान तब मिली जब उन्होंने 7 फरवरी 2026 को विजय थलपति की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) का दामन थामा। विजय ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें सीधे मुख्यमंत्री के खिलाफ मैदान में उतार दिया। बाबू की जमीनी पकड़ और स्टालिन की कार्यशैली की आंतरिक जानकारी ने टीवीके को वह बढ़त दिलाई जिसकी उसे जरूरत थी।

2021 बनाम 2026: कैसे बदल गए कोलाथुर के समीकरण

अगर हम पिछले चुनाव की तुलना करें, तो 2021 के विधानसभा चुनाव में एम.के. स्टालिन ने अन्नाद्रमुक के आदि राजाराम को एकतरफा मुकाबले में हराया था। उस समय स्टालिन की लहर थी और वे मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे। लेकिन पिछले पांच वर्षों में भ्रष्टाचार के आरोप, कानून-व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की सुस्ती ने जनता के बीच असंतोष पैदा किया। दूसरी ओर, विजय की पार्टी ने युवाओं और बदलाव चाहने वाले मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित किया। वी.एस. बाबू ने इसी असंतोष को भुनाया और स्टालिन के ‘अजेय’ होने के भ्रम को तोड़ दिया।

विजय की ‘TVK’ का उदय और तमिलनाडु की नई राजनीति

इस जीत के साथ अभिनेता विजय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे तमिलनाडु की राजनीति में केवल एक ‘वोट कटवा’ पार्टी नहीं, बल्कि सरकार बनाने की क्षमता रखने वाली शक्ति हैं। मुख्यमंत्री को उनके घर में हराना किसी भी नई पार्टी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह परिणाम न केवल डीएमके के लिए आत्ममंथन का विषय है, बल्कि अन्नाद्रमुक जैसी पुरानी पार्टियों के लिए भी खतरे की घंटी है। कोलाथुर के इन नतीजों ने साबित कर दिया है कि तमिलनाडु की जनता अब पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से इतर एक नया और युवा विकल्प तलाश रही है।

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