Mizoram Jail Break : मिजोरम जेल से 17 कैदियों का सनसनीखेज पलायन, नकली बेल ऑर्डर से मिली रिहाई

मिजोरम की लुंगलेई जिला जेल से 17 कैदियों के फर्जी बेल ऑर्डर के जरिए रिहा होने का मामला सामने आया है। जाली मुहरों और हस्ताक्षरों की मदद से POCSO और NDPS जैसे गंभीर मामलों के अपराधी जेल से बाहर निकल गए। पुलिस ने अब तक 11 को दोबारा गिरफ्तार किया है।

Mizoram Jail Break

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 13, 2026

Mizoram Jail Break : पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम से कानून-व्यवस्था और जेल प्रशासन की एक ऐसी बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिसने पूरे न्यायतंत्र को हिलाकर रख दिया है। राज्य की लुंगलेई जिला जेल में बंद 17 कैदी नकली अदालती कागजात और जाली बेल ऑर्डर (जमानत आदेश) का सहारा लेकर बड़ी आसानी से जेल की सलाखों से बाहर निकल गए। यह मामला उस वक्त उजागर हुआ जब जेल प्रशासन और कोर्ट के बीच दस्तावेजों का मिलान हुआ। इस घटना ने न केवल जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे शातिर अपराधी कानूनी प्रक्रिया की खामियों का फायदा उठाकर व्यवस्था को चकमा दे सकते हैं।

न्यायाधीश भी रह गए हैरान: POCSO और NDPS के खूंखार अपराधी थे शामिल

जैसे ही यह सनसनीखेज मामला सामने आया, लुंगलेई जिला और सत्र न्यायालय के न्यायाधीश खुद दंग रह गए। जांच में पता चला कि रिहा होने वाले इन 17 कैदियों में सजायाफ्ता मुजरिम और विचाराधीन (अंडरट्रायल) आरोपी दोनों शामिल थे। इनमें से अधिकांश कैदी पोक्सो (POCSO) एक्ट और एनडीपीएस (NDPS) जैसे गंभीर मामलों में दोषी ठहराए गए थे। बच्चों के खिलाफ यौन अपराध और ड्रग्स तस्करी जैसे जघन्य अपराधों में शामिल कैदियों का इस तरह बाहर निकलना समाज के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। जाली दस्तावेजों की शुद्धता इतनी सटीक थी कि जेल अधिकारी भी उन्हें पहली नजर में पहचान नहीं पाए।

जज ने खुद दर्ज कराई FIR: पुलिस ने शुरू किया व्यापक सर्च ऑपरेशन

मामले की गंभीरता को देखते हुए लुंगलेई जिला एवं सत्र न्यायालय के जज आर. दोहामीर ने 27 अप्रैल को लुंगलेई पुलिस स्टेशन में स्वयं एफआईआर (FIR) दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद मिजोरम पुलिस हरकत में आई और अलग-अलग टीमें बनाकर जांच शुरू कर दी गई। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और खुफिया तंत्र का इस्तेमाल करते हुए अब तक 11 फरार कैदियों को ट्रैक कर दोबारा गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। हालांकि, अभी भी 6 कैदी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिनकी तलाश में राज्य के विभिन्न हिस्सों और सीमावर्ती इलाकों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

एम्बुलेंस ड्राइवर निकला मास्टरमाइंड: रिश्वत लेकर रचा गया था पूरा खेल

मिजोरम पुलिस ने इस पूरी साजिश का पर्दाफाश करते हुए दो मुख्य मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है, जिनमें लुंगलेई जेल का एक एम्बुलेंस ड्राइवर भी शामिल है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन आरोपियों ने जेल के भीतर ही अपराधियों के साथ साठगांठ की थी। फरार होने वाले प्रत्येक कैदी से हजारों रुपये की रिश्वत ली गई थी, जिसके बदले में उन्हें बाहर निकालने के लिए पेशेवर तरीके से नकली अदालती मुहरें और दस्तावेज तैयार किए गए। ड्राइवर की जेल के भीतर सुगम पहुंच ने इस साजिश को अंजाम देने में बड़ी भूमिका निभाई। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस रैकेट में जेल विभाग या कोर्ट के कुछ निचले स्तर के कर्मचारी भी शामिल थे।

प्रशासन सख्त: न्यायतंत्र और सुरक्षा व्यवस्था की होगी पूरी समीक्षा

इस घटना ने मिजोरम सरकार और गृह विभाग को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। जांच अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि इस मामले की तह तक जाकर पूरी जांच की जाएगी और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने जेलों में बेल ऑर्डर की भौतिक पुष्टि के लिए अब डिजिटल और मैनुअल दोनों प्रक्रियाओं को और अधिक सख्त बनाने के निर्देश दिए हैं। लुंगलेई की इस घटना को एक सबक के रूप में लेते हुए राज्य की अन्य जेलों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बाकी बचे फरार अपराधियों को भी जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

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