मिशन चीता: बोत्सवाना से 9 चीते कूनो पहुंचे, भारत में कुल संख्या 48

श्योपुर  श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में शनिवार एक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। बोत्सवाना से अफ्रीकी महाद्वीप के 9 नए चीते विशेष विमान से भारत पहुंचे हैं। यह चीतों का तीसरा बड़ा जत्था है, जो 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत भारत लाया गया है। भारतीय वायुसेना के विमान से रात में ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के बाद सुबह भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से इन्हें कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया। केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन चीतों को क्वारंटाइन बाड़ों में रिलीज किया। इनके आने से भारत में चीतों की कुल संख्या 48

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Published On :

फ़रवरी 28, 2026

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श्योपुर
 श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में शनिवार एक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। बोत्सवाना से अफ्रीकी महाद्वीप के 9 नए चीते विशेष विमान से भारत पहुंचे हैं। यह चीतों का तीसरा बड़ा जत्था है, जो 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत भारत लाया गया है। भारतीय वायुसेना के विमान से रात में ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के बाद सुबह भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से इन्हें कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया।

केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन चीतों को क्वारंटाइन बाड़ों में रिलीज किया। इनके आने से भारत में चीतों की कुल संख्या 48 हो गई है। कूनो में पहले से मौजूद चीतों की सफल प्रजनन दर और शावकों का जन्म इस प्रोजेक्ट की मजबूती दिखाता है। यह कदम न सिर्फ चीता संरक्षण की दिशा में बड़ा है, बल्कि भारत में विलुप्त हो चुके इस राजसी जानवर को वापस लाने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। पार्क में विशेष तैयारियां की गई, जहां चीतों को एक महीने तक क्वारंटाइन में रखकर स्वास्थ्य जांच और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद इन्हें मुख्य बाड़े में छोड़ दिया जाएगा।

बोत्सवाना से लाये चीते कूनो में किए रिलीज

बता दें कि, बोत्सवाना से कूनो लाए गए सभी 9 चीतों में से 6 मादा हैं, जबकि 3 नर चीते। इस तरह अब कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 45 हो चुकी है। खास बात ये है कि, इनमें से 28 चीते भारत में पैदा हुए हैं। इसके अलावा 3 चीते कूनो से ही गांधीसागर वन्य क्षेत्र में छोड़े गए हैं। इस तरह देशभर में इनकी संख्या बढ़कर कुल 48 हो गई है। फिलहाल, बोत्सवाना से लाए गए सभी 9 चीतों को एक महीने के लिए पहले क्वारंटीन किया जाएगा। इके बाद ही इन्हें मुख्य क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।

वयस्क चीतों में बदला समीकरण

कूनो में 12 महीने से अधिक उम्र के चीतों का गणित अब साफ तौर पर बदल गया है। पहले यहां 26 वयस्क चीते थे 14 नर और 12 मादा। अब 9 नए चीतों के जुड़ने से वयस्कों की संख्या 35 हो गई है।

मादा: 18

नर: 17

यानी अब मादाओं का पलड़ा थोड़ा आगे है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे बेहद अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि मादाओं की संख्या बढ़ने से क्षेत्रीय टकराव कम होगा और शावकों के जन्म की संभावना बढ़ेगी।

एक माह का क्वारंटीन, फिर खुले जंगल का टिकट

आए हुए सभी 9 चीतों को एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा। इस दौरान उनकी सेहत, व्यवहार और अनुकूलन क्षमता पर लगातार नजर रहेगी। इसके बाद चीता स्टीयरिंग समिति तय करेगी कि किन चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जाए और किन्हें निगरानी में रखा जाए।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, हर चीते को जंगल में उतारने से पहले उसके मूवमेंट, शिकार प्रवृत्ति और इंसानी दखल से दूरी जैसे पहलुओं की बारीकी से जांच की जाती है।

मजबूत हुई जेनेटिक ताकत

अब कूनो एक पार्क नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जेनेटिक प्रयोगशाला बन चुका है। यहां नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना तीन अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के चीते मौजूद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अलग-अलग मूल के चीतों के मेल से इनब्रीडिंग का खतरा घटता है और शावकों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। यही वजह है कि भारत में चीता पुनर्वास को लंबे समय तक टिकाऊ माना जा रहा है।

भारत में चीतों की मौजूदा तस्वीर

कुल चीते: 48

कूनो नेशनल पार्क: 36

गांधी सागर अभयारण्य: 3

नामीबियाई मूल (स्थापित + शावक): 20

दक्षिण अफ्रीकी मूल (स्थापित + शावक): 19

भारत में जन्मे शावक: 28

आज आए (बोत्सवाना): 9

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