Health Tips: दूध हमेशा हमारे सेहत के लिए अच्छा ऑप्शन माना जाता है। यह बच्चों का पहला आहार होता है, इसमें पोषण की अधिक मात्रा पायी जाती है। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि कई लोगों को दूध का सेवन करने के बाद पेट से जुड़ी कई सारी समस्याएं जैसे गैस, पेट फूलना, दर्द या अपच का सामना करना पड़ता है। आइए डिटेल में जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है और किन लोगों को दूध से दूरी बनानी चाहिए।
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दूध पीने से गैस बनने का कारण

आपको बता दें कि, दूध में लैक्टोज नामक प्राकृतिक शुगर होती है। इसे पचाने के लिए शरीर को लैक्टेज एंजाइम की जरूरच होती है, जो छोटी आंत में बनता है। जब यह एंजाइं पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता, तो लैक्टोज सही तरह से पच नहीं पाता। नतीजतन, दूध पीने के बाद गैस, पेट फूलना, दस्त या पेट दर्द जैसी परेशानी उत्पन्न होती हैं।
लैक्टोज इंटॉलरेंस के लक्षण
लैक्टोज इंटॉलरेंस वाले लोगों को दूध या दूध से बने पदार्थ (जैसे पनीर, दही, लस्सी) लेने के बाद परेशानी होती है। इसके सामान्य लक्षण हैं:
- पेट में गैस बनना
- पेट फूलना या भारीपन महसूस होना
- पेट दर्द या ऐंठन
- दस्त या लूज मोशन
- मतली या उल्टी जैसा महसूस होना
ये लक्षण आमतौर पर दूध पीने के 30 मिनट से 2 घंटे के भीतर दिखाई देते हैं।
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किन लोगों को दूध से अधिक परेशानी हो सकती है?
हर किसी को दूध से समस्या नहीं होती, लेकिन कुछ लोगों में यह ज्यादा देखने को मिलती है:
- जिनका पाचन तंत्र कमजोर होता है
- जिन्हें पहले से गैस, एसिडिटी या पेट की समस्या रहती है
- उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों में दूध पचाने की क्षमता कम हो जाती है
- जिनको आंत से जुड़ी बीमारियां हैं, उन्हें दूध लेने पर परेशानी बढ़ सकती है
क्या दूध पीना जरूरी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के लिए मां का दूध सबसे आवश्यक होता है और यह शुरुआती 6–7 महीने तक उनकी जरूरत पूरी करता है। इसके बाद बच्चा ठोस आहार लेना शुरू कर देता है। हालांकि, दूध को हमारे खानपान और संस्कृति का हिस्सा माना जाता है और यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। लेकिन यदि किसी को दूध से समस्या होती है, तो प्रोटीन की जरूरत दाल, सोया, अंडा, मछली, मांस, और अन्य खाद्य पदार्थों से भी पूरी की जा सकती है।
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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह नहीं है।










