Mike Huckabee Israel: इजरायल में नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी के एक हालिया बयान ने मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) की राजनीति में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। एक विवादास्पद साक्षात्कार के दौरान, हकाबी ने तर्क दिया कि इजरायल को मध्य पूर्व के अधिकांश क्षेत्रों पर ऐतिहासिक और धार्मिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि यदि इजरायल इन क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण स्थापित करता है, तो इस पर दुनिया को किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हकाबी के इस कट्टरपंथी रुख ने न केवल कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि दशकों से चले आ रहे क्षेत्रीय विवादों को एक नई और अधिक खतरनाक दिशा दे दी है।
बाइबिल का हवाला और ‘ग्रेटर इजरायल’ की विचारधारा
यह विवाद तब शुरू हुआ जब माइक हकाबी अमेरिकी दक्षिणपंथी कमेंटेटर टकर कार्लसन के साथ चर्चा कर रहे थे। इस बातचीत के दौरान कार्लसन ने बाइबिल के ‘पुराने नियम’ की पुस्तक “जेनेसिस” का संदर्भ दिया, जिसमें नील नदी (मिस्र) से लेकर फरात नदी (सीरिया और इराक) तक की भूमि का वादा अब्राहम के वंशजों से किया गया था। इस पर हकाबी ने अपनी सहमति जताते हुए कहा कि अगर इजरायल इस पूरे विस्तृत भूभाग पर कब्जा कर ले, तो भी यह जायज होगा। उन्होंने दावा किया कि इजरायल केवल अपनी सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के दायरे में विस्तार कर रहा है। उनके इस तर्क को इजरायल के उन दक्षिणपंथी नेताओं के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है जो “ग्रेटर इजरायल” के विचार को वास्तविकता में बदलना चाहते हैं।
मुस्लिम देशों में आक्रोश: सऊदी अरब और मिस्र की कड़ी आपत्ति
हकाबी के इस बयान के सार्वजनिक होते ही मुस्लिम जगत से तीखी और त्वरित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इसे एक “अत्यंत कट्टरपंथी और भड़काऊ” बयानबाजी करार देते हुए अमेरिकी विदेश विभाग से अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। वहीं, मिस्र ने इस टिप्पणी को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का सीधा उल्लंघन बताया है। मिस्र की सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा कि फिलिस्तीनी और अन्य अरब क्षेत्रों पर इजरायल का कोई भी दावा पूरी तरह से आधारहीन और अवैध है। इस बयान ने अरब देशों और अमेरिका के बीच चल रहे कूटनीतिक प्रयासों को भी गहरा धक्का पहुँचाया है।
जॉर्डन और OIC का रुख: क्षेत्रीय संप्रभुता पर हमला
जॉर्डन के अधिकारियों ने भी हकाबी की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के बयान राजनीतिक मर्यादाओं को पार कर गए हैं और यह सीधे तौर पर पड़ोसी देशों की संप्रभुता पर हमला है। इसके साथ ही, 57 मुस्लिम देशों के संगठन ‘ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन’ (OIC) ने भी एक कड़ा निंदा प्रस्ताव जारी किया है। OIC के अनुसार, एक वरिष्ठ राजनयिक द्वारा ऐसे विस्तारवादी विचारों को बढ़ावा देना न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि यह क्षेत्र में जारी संघर्ष को और अधिक भड़काने का काम करेगा। मुस्लिम देशों का मानना है कि ऐसे बयानों से इजरायल के कट्टरपंथियों का हौसला बढ़ेगा, जिससे शांति वार्ता पूरी तरह ठप हो सकती है।
हकाबी का राजनीतिक इतिहास और कूटनीतिक संकट
रिपब्लिकन पार्टी से ताल्लुक रखने वाले और अर्कांसस के पूर्व गवर्नर रहे माइक हकाबी लंबे समय से फिलिस्तीन के लिए “दो-देश समाधान” (Two-State Solution) के धुर विरोधी रहे हैं। वह इजरायल की बस्तियों के विस्तार के सबसे मुखर समर्थकों में गिने जाते हैं। राजदूत के रूप में उनकी नियुक्ति के समय भी कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि उनका झुकाव शांति की राह में बाधा बन सकता है। वर्तमान में, उनकी इस ताजा टिप्पणी ने न केवल अमेरिका की मध्य पूर्व नीति को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि क्षेत्रीय तनाव को एक ऐसे बिंदु पर पहुँचा दिया है जहाँ भविष्य में सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है।









