Middle East War: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में एक कड़ा बयान जारी करते हुए अमेरिका और इजरायल की रणनीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की है। अराघची ने दावा किया कि वर्तमान में जारी संघर्ष कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि ईरान पर जानबूझकर थोपी गई एक जंग है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह युद्ध न केवल मध्य पूर्व की शांति भंग कर रहा है, बल्कि इसका सीधा और गहरा असर आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर भी पड़ने वाला है। ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी नीतियों के माध्यम से वॉशिंगटन को एक ऐसे क्षेत्रीय दलदल में धकेल रहे हैं, जिससे निकलना नामुमकिन होगा।
‘वॉर ऑफ चॉइस’ और 200 अरब डॉलर की भारी कीमत
अब्बास अराघची ने इस संघर्ष को “वॉर ऑफ चॉइस” यानी ‘चुनी गई जंग’ करार दिया है। उनका आरोप है कि इजरायल और अमेरिका ने ईरान को अस्थिर करने के उद्देश्य से इस तनाव को हवा दी है। अराघची ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि इस युद्ध के कारण अब तक लगभग 200 अरब डॉलर का भारी-भरकम खर्च हो चुका है। उन्होंने इसे भविष्य की एक बड़ी तबाही की आहट बताया और कहा कि यह खर्च जल्द ही ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। ईरानी मंत्री ने इसे “इजरायल फर्स्ट टैक्स” का नाम दिया, जिसका आर्थिक बोझ अंततः अमेरिकी मध्यम वर्ग को उठाना पड़ेगा।
युद्ध में अमेरिका की सीधी भागीदारी पर उठे सवाल
ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों में “हम” जैसे शब्दों के प्रयोग पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका इस युद्ध में केवल समर्थक नहीं, बल्कि एक सक्रिय भागीदार है। अराघची का आरोप है कि अमेरिकी हथियारों और समर्थन के दम पर इजरायल ने अस्पतालों, स्कूलों और ऐतिहासिक धरोहरों जैसे नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है। उनके अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों और युद्ध के नियमों का खुला उल्लंघन है, जिसके लिए अमेरिका को भी बराबर का जिम्मेदार माना जाना चाहिए।
अमेरिका के भीतर बढ़ता विरोध और इस्तीफों का दौर
युद्ध की बढ़ती भयावहता को देखते हुए अमेरिका के भीतर भी असंतोष की लहर दौड़ गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख नेता जैसे टिम केन और एडम शिफ ने इस जंग को “गैरकानूनी” बताते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग की है। उनका तर्क है कि सरकार जनता को युद्ध के वास्तविक कारणों और खतरों के बारे में अंधेरे में रख रही है। वहीं, जो केंट जैसे उच्च अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। केंट का मानना है कि ईरान से अमेरिका को कोई तत्काल खतरा नहीं था, फिर भी युद्ध की स्थिति पैदा की गई।
ट्रंप की सैन्य रणनीति और ‘अमेरिका फर्स्ट’ की चुनौती
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्तमान में मिडिल ईस्ट के इस जटिल संकट में फंसे हुए नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहाँ उन्होंने हजारों अमेरिकी सैनिकों को क्षेत्र में तैनात करने की योजना बनाई है, वहीं दूसरी तरफ खुद उनकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स ईरान को अमेरिका के लिए बहुत बड़ा खतरा नहीं मानती हैं। अब ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे अपने “अमेरिका फर्स्ट” (America First) के वादे को निभाते हुए युद्ध से पीछे हटते हैं या इजरायल के समर्थन में इस संघर्ष में और गहराई तक उतरते हैं।
आर्थिक और पर्यावरणीय नुकसान का बढ़ता दायरा
इस भीषण युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट के कई महत्वपूर्ण तेल और गैस संयंत्रों में आग लगी हुई है, जिससे न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को चोट पहुँच रही है, बल्कि पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति हो रही है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर फैलाए गए कथित दावों ने स्थिति को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहाँ से कूटनीतिक वापसी कठिन दिखाई देती है। अराघची ने अंत में स्पष्ट किया कि जब तक बाहरी देशों का हस्तक्षेप और दखलंदाजी बंद नहीं होती, तब तक इस क्षेत्र में स्थिरता और शांति की बहाली एक असंभव कार्य बना रहेगा।
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