Middle East War: ट्रंप की डील पर ईरान का सख्त रुख, परमाणु मुद्दे पर समझौते से इनकार

अमेरिका द्वारा युद्ध खत्म करने के लिए रखी गई शर्तों पर ईरान भड़क गया। तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि वह अमेरिका के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

Middle East War

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 30, 2026

Middle East War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्ध समाप्ति और समझौते के लिए रखी गई 6 शर्तों पर ईरान ने कड़ी नाराजगी जताई है। हालांकि, शर्तों के सामने आने के बाद ईरान सरकार की तरफ से कोई औपचारिक या आधिकारिक बयान तो जारी नहीं किया गया है, लेकिन ईरान ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वह अपने रुख में किसी भी तरह की ढील नहीं देगा। विशेष रूप से, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने से साफ इनकार कर दिया है।

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“कार्रवाई के बिना कोई बात नहीं”

ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गलिबाफ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अमेरिकी प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिका द्वारा दी जाने वाली किसी भी सुरक्षा गारंटी पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। गलिबाफ ने जोर देकर कहा, “ईरान अपनी मिसाइल क्षमता और सैन्य ताकत के बल पर हर तरह का अंतरराष्ट्रीय दबाव झेलने में सक्षम है। तेहरान (ईरान) अब केवल शब्दों पर नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई के आधार पर ही कोई फैसला करेगा। जब तक अमेरिका व्यावहारिक रूप से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाता, तब तक ईरान की तरफ से भी कोई पहल नहीं की जाएगी।”

बातचीत के लिए ईरान ने भी रख दीं अपनी शर्तें

ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को टोल-फ्री करने और अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के संकेत तो दिए हैं, लेकिन ये बातें मुख्य समझौते का हिस्सा तभी बनेंगी जब अमेरिका ईरान की मांगों को पूरा करेगा। ईरान ने बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए निम्नलिखित शर्तें सामने रखी हैं, अमेरिका को तुरंत ईरान की फ्रीज की गई $12 अरब (12 बिलियन डॉलर) की संपत्ति को डिफ्रीज करना होगा।

लेबनान में पूरी तरह से युद्धविराम लागू किया जाए और हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल के सैन्य एक्शन पर तुरंत रोक लगाई जाए। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों को ‘आधा सच और आधा झूठ’ करार देते हुए कहा कि यह जल्दबाजी में अपनी जीत घोषित करने जैसा है। ईरान अपने फैसले केवल अपनी जनता के हितों और अधिकारों को ध्यान में रखकर लेता है, वह किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

सिचुएशन रूम से ट्रंप का अल्टीमेटम

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वे ईरान पर अंतिम नीति तय करने के लिए व्हाइट हाउस के ‘सिचुएशन रूम’ (वह स्थान जहाँ से वैश्विक संकटों की मॉनिटरिंग होती है) में जा रहे हैं। उन्होंने अपनी तरफ से एकतरफा युद्ध समाप्ति के लिए ये 6 कड़ी शर्तें रखी थी। ईरान को यह लिखित में स्वीकार करना होगा कि वह कभी भी परमाणु बम या हथियार नहीं बनाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी टोल टैक्स के तुरंत खोला जाए, ताकि मालवाहक और सैन्य जहाजों का आवागमन निर्बाध रूप से हो सके।

यदि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें (Water Mines) हैं, तो उन्हें अमेरिकी सेना द्वारा नष्ट किया जाएगा। नाकेबंदी के कारण वहां फंसे हुए सभी जहाजों को सुरक्षित वापसी की अनुमति दी जाएगी। संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को अमेरिका, ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में नष्ट किया जाएगा। ईरान की वैश्विक संपत्तियां तब तक ब्लॉक रहेंगी और आर्थिक लेन-देन पर रोक जारी रहेगी, जब तक कि आगे का कोई आदेश नहीं आ जाता।

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