Middle East War: इजरायली बमबारी से दहला ईरान, सैन्य ठिकानों और एयरबेस को बनाया निशाना

इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध 27वें दिन (26 मार्च 2026) में प्रवेश कर चुका है। इजरायली सेना ने ईरान के इस्फहान शहर के रणनीतिक सैन्य ठिकानों और एयरबेस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है, जिससे पूरा इलाका भारी धमाकों से दहल उठा।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 26, 2026

Middle East War: ईरान और इजरायल के बीच युद्ध 27वें दिन में प्रवेश कर चुका है। गुरुवार सुबह ईरान के इस्फहान शहर के आसपास जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। यहां ईरान का बड़ा एयर बेस और कई सैन्य सुविधाएं मौजूद हैं। इजरायल ने दावा किया कि उसने इस्फहान में प्रोडक्शन एरिया और रक्षा से जुड़ी जगहों को निशाना बनाया। कई औद्योगिक साइट्स प्रभावित हुईं, जहां हथियारों से जुड़ी सामग्री तैयार की जाती है।

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अमेरिका का बयान

अमेरिका ने कहा है कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसने ईरान के 10 हजार सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। साथ ही अमेरिकी सेना ने दावा किया कि ईरान के 92 फीसदी जहाज नष्ट कर दिए गए हैं। यह संयुक्त कार्रवाई ईरान के मिसाइल और रक्षा कार्यक्रम को कमजोर करने पर केंद्रित है।

ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने बताया कि हमले दो आवासीय इलाकों पर हुए, हालांकि विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई। इससे पहले भी इस्फहान को निशाना बनाया जा चुका है। जून 2025 में अमेरिका ने यहां के न्यूक्लियर साइट पर बमबारी की थी।

खाड़ी देशों में हमले

ईरान ने पिछले 24 घंटों में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों पर भी हमले तेज कर दिए हैं।

कुवैत: अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक पर दो ड्रोन हमले हुए, जिससे आग लग गई। दमकल टीमें आग बुझाने में जुटी हैं।

बहरीन: मुहर्रक इलाके की एक सुविधा में आग लगी, जिसे बिना किसी हताहत के बुझा लिया गया।

यूएई: सायरन की आवाजें सुनाई दीं।

सऊदी अरब: पूर्वी प्रांत में दर्जनभर ड्रोन और मिसाइलों को रोक लिया गया।

कुवैत एयरपोर्ट की आग अभी भी पूरी तरह काबू में नहीं आई है, जिससे हवाई यातायात प्रभावित हो रहा है।

क्षेत्रीय तनाव

ईरान के इन हमलों से स्पष्ट है कि युद्ध अब केवल इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रहा। खाड़ी देशों की हवाई सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती मिल रही है। भले ही अधिकांश हमले रोके जा रहे हैं, लेकिन कुछ ड्रोन बचकर निकल जाते हैं और ईंधन टैंकों जैसी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

बातचीत की अटकलें

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पाकिस्तान इस संघर्ष में मध्यस्थता कर सकता है और बातचीत पाकिस्तान में हो सकती है। हालांकि अमेरिका ने इन खबरों को खारिज कर दिया है। ईरान ने भी साफ कहा है कि अमेरिका के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। पाकिस्तान या तुर्किए में चर्चा की संभावना पर भी कोई पुष्टि नहीं हुई है।

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