Middle East Conflict: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ किसी भी तरह के युद्धविराम की संभावना से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में अमेरिका समझौते के बजाय अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखना चाहता है।
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‘युद्धविराम का सवाल ही नहीं’
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि जब कोई पक्ष दूसरे पर पूरी तरह हावी हो रहा हो, तब युद्धविराम की बात करना सही नहीं होता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बातचीत की गुंजाइश हमेशा रहती है, लेकिन फिलहाल वह युद्धविराम के पक्ष में नहीं हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर चिंता
ट्रंप ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम Strait of Hormuz का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह जलमार्ग समय आने पर खुद ही खुल जाएगा, लेकिन इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। उनका मानना है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए कई देशों को मिलकर काम करना होगा, क्योंकि यह दुनिया के तेल और गैस परिवहन का एक बड़ा हिस्सा संभालता है।
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चीन और जापान से सहयोग की उम्मीद
ट्रंप ने इस मुद्दे पर China और Japan का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर ये देश होर्मुज जलमार्ग को सुरक्षित बनाने में सहयोग करें, तो स्थिति को बेहतर ढंग से संभाला जा सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अन्य बड़े देशों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
नाटो और सहयोगियों पर निशाना
इस दौरान ट्रंप ने NATO और अन्य सहयोगी देशों की आलोचना भी की। उनका कहना था कि इन देशों ने अभी तक इस संकट में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर नाराजगी जताई कि होर्मुज जलमार्ग को खोलने में सहयोगी देश आगे नहीं आए।
इजरायल के रुख पर क्या कहा
जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद Israel युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार होगा, तो ट्रंप ने उम्मीद जताई कि ऐसा संभव है। उन्होंने संकेत दिया कि हालात सामान्य होने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। ईरानी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को घेरने से समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है। इसके कारण तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
आगे क्या हो सकता है
मौजूदा हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका का सख्त रुख और अन्य देशों की सीमित भागीदारी स्थिति को और जटिल बना सकती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और कूटनीतिक प्रयास ही इस संकट को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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