Iran Us War: मध्य पूर्व (Middle East) में शांति बहाल करने की कोशिशों को एक बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की मध्यस्थ वार्ता अब अनिश्चितता के घेरे में है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) के जलमार्ग पर ईरान द्वारा फिर से की गई नाकेबंदी ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। 21 अप्रैल को दोनों देशों के बीच घोषित युद्धविराम (Ceasefire) की समय सीमा समाप्त हो रही है, जिससे क्षेत्र में एक बार फिर भीषण संघर्ष की आहट सुनाई दे रही है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की नाकेबंदी
बताते चले कि, लेबनान में सीजफायर के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि हॉर्मुज का रास्ता खुला रहेगा, लेकिन ईरान ने 24 घंटे के भीतर ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की दोबारा नाकेबंदी और समुद्री व्यापार पर प्रतिबंध लागू कर दिया। न्यूज एजेंसी के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कर स्पष्ट किया कि यह नाकेबंदी शांति वार्ता और द्विपक्षीय बातचीत में प्रमुख बाधा बनी हुई है। ट्रंप ने इस मुद्दे पर मुनीर की सलाह पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
21 अप्रैल को समाप्त हो रहा युद्धविराम
आपको बता दे कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम और सीजफायर की अवधि अब अपने अंतिम चरण में है। 21 अप्रैल के बाद यदि कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो मध्य पूर्व में फिर से मिसाइलें बरस सकती हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शांति मिशन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ईरान-अमेरिका संघर्ष विराम और कूटनीतिक मिशन को आगे बढ़ाने के लिए इस्लामाबाद पहुंचने वाले हैं। हालांकि, इस बार उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पाकिस्तान जाने की संभावना नहीं है।
इस्लामाबाद के नूरखान एयरबेस पर सैन्य हलचल
रविवार को इस्लामाबाद के नूरखान एयरबेस पर अमेरिका के चार सैन्य विमानों की लैंडिंग और सुरक्षा उपकरण पहुंचने से हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि इन विमानों में अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के 22 अधिकारी और उपराष्ट्रपति की सुरक्षा गाड़ियां शामिल हैं। इस्लामाबाद पुलिस ने सुरक्षा एडवाइजरी और रूट डायवर्जन जारी कर दी है, जिससे स्पष्ट है कि पर्दे के पीछे उच्चस्तरीय शांति वार्ता की तैयारियां और सुरक्षा इंतजाम अत्यंत गोपनीय तरीके से चल रहे हैं।
ईरान का सख्त रुख और परमाणु अधिकार
दूसरी ओर, ईरान ने फिलहाल किसी भी तरह की बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। तेहरान का आरोप है कि वाशिंगटन बहुत अधिक अनुचित मांगें कर रहा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने देश के परमाणु कार्यक्रम और संप्रभु तकनीकी अधिकार पर अडिग रहते हुए कहा कि कोई भी शक्ति ईरान के तकनीकी विकास के अधिकार को नहीं छीन सकती। ईरान-अमेरिका तनाव और न्यूक्लियर एजेंडा के चलते वार्ता शुरू होने से पहले ही पटरी से उतरती नजर आ रही है।









