MGNREGA Bachao Sangram: कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू, मोदी सरकार के वीबी जीरामजी क़ानून के खिलाफ विरोध

क्या ग्रामीण भारत की लाइफलाइन 'मनरेगा' अब हमेशा के लिए इतिहास बन जाएगी? मोदी सरकार के नए 'वीबी जीरामजी' कानून ने विपक्ष को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है। कांग्रेस ने इसे गरीबों के हक पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' करार देते हुए 45 दिनों के महा-संग्राम का ऐलान किया है। क्या यह आंदोलन किसान आंदोलन जैसा रुख लेगा?

MGNREGA Bachao Sangram

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 3, 2026

MGNREGA Bachao Sangram: कांग्रेस ने केंद्रीय सरकार द्वारा लाए गए वीबी जीरामजी कानून के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। यह आंदोलन “मनरेगा बचाओ संग्राम” के नाम से चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य केंद्र के इस नए कानून के खिलाफ आवाज उठाना है। कांग्रेस ने 10 जनवरी से 25 फरवरी तक तीन चरणों में देशभर में अभियान चलाने की घोषणा की है। इस दौरान पंचायत स्तर से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर धरना और रैलियां आयोजित की जाएंगी।

MGNREGA Bachao Sangram: पहले चरण में प्रेस कांफ्रेंस और उपवास

कांग्रेस पार्टी ने अपने अभियान का पहला चरण 10 जनवरी को शुरू करने का निर्णय लिया है, जब जिला कांग्रेस कार्यालयों पर प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की जाएगी। इसके बाद, 11 जनवरी को पार्टी के नेता जिला मुख्यालय या गांधी/अंबेडकर मूर्तियों के पास एक दिन का उपवास रखेंगे। यह उपवास मनरेगा के अधिकारों की रक्षा और वीबी जीरामजी कानून के विरोध में होगा।

MGNREGA Bachao Sangram: दूसरा चरण: ग्राम पंचायतों पर चौपाल और पत्र वितरण

मनरेगा बचाओ संग्राम का दूसरा चरण 12 जनवरी से शुरू होगा, जो 30 जनवरी तक चलेगा। इस चरण में ग्राम पंचायत स्तर पर चौपाल आयोजित की जाएंगी, जहां कांग्रेस नेता गांववासियों से सीधे संपर्क करेंगे और उन्हें इस आंदोलन से जोड़ेेंगे। इस दौरान कांग्रेस के नेता विपक्ष राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की चिट्ठी कांग्रेस कार्यकर्ताओं, ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा मजदूरों को सौंपी जाएगी। 30 जनवरी को शहीद दिवस के दिन, वार्ड स्तर पर धरना भी आयोजित किया जाएगा।

तीसरे चरण में जिला मुख्यालयों पर धरना

तीसरे चरण का आयोजन 31 जनवरी से 6 फरवरी तक किया जाएगा। इस चरण में कांग्रेस पार्टी देश भर के जिला मुख्यालयों पर मनरेगा बचाओ धरना आयोजित करेगी। इस चरण में कार्यकर्ताओं द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। 7 से 15 फरवरी के बीच, विधानसभाओं का घेराव किया जाएगा, ताकि सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया जा सके। इसके बाद 16 से 25 फरवरी तक चार बड़ी रैलियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे जैसे बड़े नेता शामिल होंगे। इन रैलियों की तारीख और स्थान की घोषणा जल्द की जाएगी।

कांग्रेस ने वीबी जीरामजी क़ानून पर निशाना साधा

वीबी जीरामजी क़ानून के खिलाफ कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा कि इस कानून का नाम बड़ा होने के बावजूद इसके भीतर रोजगार की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने बताया कि इस कानून में राज्य सरकारों के लिए कोई वित्तीय सहायता की गारंटी नहीं दी गई है, और केंद्र सरकार ही तय करेगी कि किस पंचायत को पैसे मिलेंगे। रमेश ने यह भी कहा कि यह कानून अब रोजगार का अधिकार नहीं, बल्कि केंद्र सरकार का केंद्रीय कार्यक्रम बन गया है।

कांग्रेस का अन्य दलों और संगठनों को साथ लाने का प्रयास

कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह अपने “मनरेगा बचाओ संग्राम” में अन्य विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों को भी शामिल करेगी। उनका मानना है कि इस आंदोलन का परिणाम वही होगा जो तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुआ था, यानी मनरेगा को फिर से बचाया जाएगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विपक्षी दल आपस में बात करेंगे और इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाएंगे। इस कड़ी में, कांग्रेस वीबी जीरामजी क़ानून को अदालत में चुनौती देने की भी योजना बना रही है।

बीजेपी की प्रतिक्रिया: अभियान से कांग्रेस को मिलेगी मदद

कांग्रेस के आक्रामक रुख के जवाब में, बीजेपी भी नए कानून के पक्ष में माहौल बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि बीजेपी के अभियान से कांग्रेस को ही मदद मिलेगी, और मनरेगा बचाओ संग्राम के पक्ष में माहौल बनेगा। इस प्रकार, कांग्रेस अपने अभियान के जरिए इस कानून के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने और विरोध का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।

Read More : मध्य प्रदेश में दूषित पानी की समस्या को लेकर नया कदम, मोहन यादव ने लागू की वाटर सीवर गाइडलाइन