Meerut Crime : मेरठ में रूह कंपा देने वाली वारदात, बेरहम पिता ने घर के अंदर 4 महीने तक छिपाए रखा बेटी का कंकाल

मेरठ के एक साधारण से दिखने वाले घर के भीतर पिछले चार महीनों से मौत का एक ऐसा खौफनाक सन्नाटा पसरा था जिसकी कल्पना भी मुमकिन नहीं। एक पिता अपनी ही जवान बेटी के कंकाल के साथ एक ही छत के नीचे रह रहा था। क्या यह हत्या थी या कोई अंधविश्वास?

Meerut Crime

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 11, 2026

Meerut Crime :  उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सदर बाजार क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं और मानसिक स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ के तेली मोहल्ले में एक रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी, उदय भानु बिस्वास, अपनी 35 वर्षीय बेटी प्रियंका के शव के साथ पिछले चार महीनों से रह रहे थे। प्रियंका पेशे से एक प्राइवेट कंप्यूटर टीचर थी, जिसकी मौत बीमारी के कारण दिसंबर 2025 में ही हो गई थी। अपनी बेटी के प्रति अत्यधिक मोह और उसे खुद से अलग न करने की सनक में, पिता ने न तो किसी को उसकी मौत की खबर दी और न ही उसका अंतिम संस्कार किया। घर के भीतर शव इस कदर सड़ चुका था कि वह पूरी तरह कंकाल में तब्दील हो गया, लेकिन पिता लगातार उस पर परफ्यूम छिड़क कर बदबू दबाने की कोशिश करता रहा।

रिश्तेदारों की सजगता से खुला राज: कूड़े के ढेर के बीच मिला शव

इस सनसनीखेज मामले का खुलासा तब हुआ जब उदय भानु के कुछ रिश्तेदारों को उनके वापस मेरठ आने की भनक लगी। उदय भानु काफी समय से रिश्तेदारों से बच रहे थे और फोन पर झूठ बोल रहे थे कि वे देहरादून में हैं और प्रियंका का इलाज चल रहा है। शुक्रवार शाम जब रिश्तेदार उन्हें पकड़कर जबरन उनके घर ले गए, तो घर के अंदर का मंजर देखकर उनकी रूह कांप गई। पूरे घर में कूड़े का अंबार लगा था और एक कमरे से असहनीय दुर्गंध आ रही थी। कमरे के अंदर बेड पर प्रियंका का शव पड़ा था, जो अब केवल हड्डियों का ढांचा मात्र रह गया था। रिश्तेदारों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने स्थिति का जायजा लिया।

अतीत का गहरा सदमा: पत्नी की आत्महत्या और परिवार का अलगाव

पुलिस जांच में इस परिवार के दुखद अतीत की परतें भी खुली हैं। उदय भानु बिस्वास, जो कभी काशी के शिक्षा विभाग में उच्च पद पर तैनात थे, 2010 में रिटायर हुए थे। उनकी पत्नी शर्मिष्ठा ने करीब 13 साल पहले घर में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मां की मौत के बाद प्रियंका गहरे सदमे में चली गई थी और उसने खुद को दुनिया से काट लिया था। उदय भानु भी पड़ोसियों और रिश्तेदारों से दूरी बनाकर रखते थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पिता-पुत्री को महीनों से बाहर निकलते नहीं देखा था। संभवतः इसी अकेलेपन और मानसिक अवसाद ने उदय भानु को इस कदर प्रभावित किया कि वे मृत बेटी को भी जीवित मानकर या उसके शव को ही अपना सहारा समझकर घर में कैद रहे।

देहरादून का फर्जी ठिकाना और पुलिस की कार्रवाई

पूछताछ में यह बात सामने आई कि 1 दिसंबर को मौत होने के बाद उदय भानु कुछ दिनों तक शव के पास रहे, फिर घर में ताला लगाकर देहरादून चले गए। जब भी कोई रिश्तेदार संपर्क करता, तो वे नए नंबरों से बात करते और बेटी के अस्पताल में भर्ती होने का बहाना बनाते। कुछ दिन पहले ही वे चुपके से मेरठ लौटे थे। पुलिस को घर से परफ्यूम की कई खाली बोतलें मिली हैं, जिनका उपयोग वे सड़ांध छिपाने के लिए करते थे। उदय भानु का दावा है कि प्रियंका को ‘काला पीलिया’ था और वे उसका तांत्रिक इलाज (झाड़-फूंक) करवा रहे थे।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार: क्या यह महज एक प्राकृतिक मौत थी?

सीओ कैंट नवीना शुक्ला के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला बीमारी से हुई मौत और उसके बाद शव को छिपाने का लग रहा है। हालांकि, पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। शव की स्थिति इतनी खराब थी कि मौत के सटीक समय और कारण का पता लगाना चुनौतीपूर्ण है। कंकाल बन चुके अवशेषों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने उदय भानु को हिरासत में ले लिया है और उनसे आगे की पूछताछ की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस मौत में कोई अन्य आपराधिक पहलू तो शामिल नहीं है।

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