Meenakshi Natarajan: कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन खारिज किए जाने का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। बुधवार देर रात (10 जून, 2026) उनके पक्ष की ओर से याचिका दाखिल की गई, जिसमें निर्वाचन प्रक्रिया के फैसले को चुनौती दी गई है। सूत्रों के अनुसार, उनके वकील गुरुवार सुबह 10:30 बजे अदालत में इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर सकते हैं।
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राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव
मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक गरमा गया है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। यह फैसला भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आपत्ति को स्वीकार करने के बाद लिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उम्मीदवार ने अपने नामांकन पत्र (फॉर्म 26) में एक लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छुपाई है।
नामांकन खारिज करने की मुख्य वजह
रिटर्निंग ऑफिसर के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना से जुड़े एक कथित आपराधिक मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र में नहीं दी थी। यह मामला वर्ष 2025 में हैदराबाद कोर्ट से जारी नोटिस से संबंधित बताया गया है। अधिकारी ने कहा कि उम्मीदवार ने नोटिस का जवाब तो दिया था, लेकिन उसे लंबित आपराधिक मामले के रूप में फॉर्म 26 में दर्ज नहीं किया गया। इसी आधार पर नामांकन को अधूरा मानते हुए खारिज कर दिया गया।
कांग्रेस ने फैसले को बताया गलत
कांग्रेस पार्टी ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे कानूनी रूप से गलत बताया है। पार्टी का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई वास्तविक आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और न ही किसी अदालत ने उनके खिलाफ कोई संज्ञान लिया है। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि भाजपा ने राजनीतिक लाभ के लिए इस प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की है, ताकि राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट हासिल की जा सके।
बीजेपी का पक्ष
भारतीय जनता पार्टी ने अपने रुख में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी उम्मीदवारों को अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है। बीजेपी का दावा है कि संबंधित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया को छिपाना नियमों का उल्लंघन है, इसलिए नामांकन को सही तरीके से खारिज किया गया है।
कानूनी व्याख्या पर टिकी पूरी लड़ाई
इस मामले में मुख्य विवाद यह है कि क्या सिर्फ कोर्ट नोटिस को “लंबित आपराधिक मामला” माना जाएगा या नहीं। कांग्रेस का तर्क है कि केवल नोटिस जारी होना किसी आपराधिक मामले के बराबर नहीं है, जबकि चुनाव अधिकारी और बीजेपी इसे अनिवार्य खुलासा मान रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में अब सभी की नजरें
अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है, जहां जल्द सुनवाई की संभावना है। अदालत का फैसला न केवल मीनाक्षी नटराजन के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि नामांकन प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े नियमों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है और सभी की नजरें अब सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं।










