UP Politics: मायावती का सरकार पर बड़ा हमला, BJP-AAP को लेकर भी दी चेतावनी

बसपा प्रमुख मायावती ने बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और भ्रष्टाचार को लेकर केंद्र व राज्य सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने सरकारी विभागों में खाली पदों पर पारदर्शी भर्ती, एक परिवार में एक सरकारी नौकरी और युवाओं के मुद्दों पर संसद में चर्चा की मांग की। मायावती ने संत रविदास गुरुघर मामले को लेकर BJP और AAP पर भी सवाल उठाए।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 10, 2026

UP Politics: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देश में बेरोजगारी, महंगाई, अशिक्षा और भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्याओं को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा है। सोमवार को जारी अपने बयान में मायावती ने कहा कि इन जनसमस्याओं के प्रति सरकारों की कथित उदासीनता चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि गरीबों, श्रमिकों, युवाओं और महिलाओं की वास्तविक समस्याओं पर सरकारों को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

बसपा सरकार में ढाई लाख सरकारी पद सृजित करने का दावा

बताते चले कि, मायावती ने अपने बयान में दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के कार्यकाल के दौरान पुलिस और पंचायती राज विभाग में करीब ढाई लाख नए सरकारी पद सृजित किए गए थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को रोजगार देने के लिए सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने की आवश्यकता है।

बसपा प्रमुख ने प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार पर भी चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि सभी विभागों में रिक्त पदों पर समयबद्ध, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त भर्ती कराई जाए, ताकि युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

जंतर-मंतर आंदोलन को मायावती ने बताया अहम मुद्दा

इसी कड़ी में आगे, मायावती ने जंतर-मंतर पर चले 36 दिन के आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के कारण बेरोजगारी, शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर महत्व मिला। मायावती ने दावा किया कि आंदोलन के राजनीतिक प्रभाव के चलते देश के शिक्षा मंत्री को भी अपना पद गंवाना पड़ा। उन्होंने संसद के मौजूदा सत्र में जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे युवाओं के मुद्दों को लेकर जारी गतिरोध समाप्त करने की अपील की। उनका कहना है कि युवाओं से जुड़े रोजगार और शिक्षा के सवालों पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

मायावती बोलीं- ‘हर हाथ को काम’ नीति जरूरी

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि यदि एक परिवार में कम से कम एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिलती है तो इससे लाखों परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में अवसर मिलने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के संवैधानिक अधिकारों और आत्मसम्मान को भी मजबूती मिलेगी।

मायावती ने सरकारों से राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में बेचने की नीति पर पुनर्विचार करने और रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारों को मुनाफे की सोच के बजाय संविधान की मानवतावादी भावना के अनुरूप नीतियां लागू करनी चाहिए।

संत रविदास गुरुघर मामले पर BJP और AAP को घेरा

मायावती ने अपने बयान में भाजपा और आम आदमी पार्टी को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने 10 अगस्त 2019 को दिल्ली के तुगलकाबाद में संत गुरु रविदास के गुरुघर को बुलडोजर से गिराए जाने की घटना का जिक्र किया।उन्होंने कहा कि इस घटना के विरोध में देशभर में प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों की कार्रवाई हुई और कई लोगों को जेल भी जाना पड़ा। मायावती के मुताबिक, गुरुघर की भूमि से जुड़े विवाद के कारण श्रद्धालुओं को अस्थायी टीन शेड में माथा टेकने के लिए मजबूर होना पड़ा।

पंजाब चुनाव से पहले संत रविदास के नाम पर राजनीति का आरोप

बसपा प्रमुख ने कहा कि गुरुघर और संत रविदास से जुड़े मुद्दे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब चुनाव से पहले भाजपा संत रविदास के नाम पर कलश यात्रा के जरिए समाज का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।उन्होंने धलेता गांव में गुरुघर की दीवार गिराए जाने के मामले का भी उल्लेख किया। मायावती के अनुसार, बसपा और संगत के विरोध के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार को उसका पुनर्निर्माण कराना पड़ा।

मायावती ने अंत में समाज के लोगों से भाजपा और आम आदमी पार्टी की राजनीति से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि रोजगार, शिक्षा, महंगाई और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों पर जनता को जागरूक होकर अपने हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।