Up News: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने राज्य विधानमंडल के लगातार छोटे होते जा रहे सत्रों के कार्यकाल को लेकर अपनी बेहद गहरी और गंभीर चिंता प्रकट की है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर अपनी खुलकर राय व्यक्त करते हुए कहा कि विधानमंडल का यह मौजूदा मानसून सत्र पूरी तरह से राज्य की आम जनता के असली मुद्दों और समस्याओं के प्रति समर्पित होना चाहिए। उन्होंने दो टूक शब्दों में यह भी कहा कि इस अत्यंत छोटे सत्र को केवल राजनीतिक खींचतान, आरोप-प्रत्यारोप या किसी प्रकार की महज औपचारिकता बनकर बिल्कुल नहीं रह जाना चाहिए।
अनुपूरक बजट पेश होने पर मायावती की नसीहत
बसपा प्रमुख ने अपने आधिकारिक बयान में स्थिति को स्पष्ट करते हुए लिखा कि मात्र चार कार्य दिवसों वाले इस अत्यंत संक्षिप्त सत्र के दौरान सरकार द्वारा अनुपूरक बजट पेश किया जाना है। हालांकि सत्र की समयावधि बहुत ही कम है, फिर भी राज्य की आम जनता को यही प्रबल उम्मीद है कि यह महत्वपूर्ण सत्र केवल राजनीतिक हंगामे या कोरे हंगामे की भेंट नहीं चढ़ेगा। उन्होंने विशेष रूप से सुझाव दिया कि संसद के वर्तमान सत्र जैसी गतिरोधपूर्ण स्थिति से पूरी तरह बचते हुए सदन के भीतर केवल जनहित, जनकल्याण तथा जनता से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं पर ही पूरा ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
अफसरशाही को संविधान के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए मजबूत विधायिका की सख्त जरूरत
बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस अति महत्वपूर्ण बात पर सबसे अधिक जोर दिया कि बेलगाम होती अफसरशाही को संविधान के दायरे और उसके प्रति पूरी तरह जवाबदेह बनाए रखने के लिए विधायिका के संवैधानिक प्रभाव का मजबूत रहना बेहद अनिवार्य है। उन्होंने आगाह किया कि लगातार घटते जा रहे कार्य दिवसों के कारण क्या विधानसभा का यह सत्र अपने मूल संवैधानिक उद्देश्यों को पूरी तरह प्राप्त कर पाएगा या फिर यह केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा, इसे लेकर प्रदेश की जनता के मन में एक स्वाभाविक और गहरी चिंता बनी हुई है।
सुचारू कामकाज की उम्मीद
मायावती ने अपने संदेश के अंत में इस बात को रेखांकित किया कि देश और प्रदेश के लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने तथा नौकरशाही पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष—दोनों को ही बेहद गंभीर संसदीय आचरण का परिचय देना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनप्रतिनिधि सदन के अंदर अपनी मर्यादा और जिम्मेदारी का पालन करते हुए जनता के कल्याण से जुड़े अहम विषयों पर सार्थक चर्चा करेंगे, ताकि इस संक्षिप्त सत्र का भी राज्य की भलाई के लिए सकारात्मक उपयोग किया जा सके।










