UP Politics: कांशीराम जयंती पर मायावती का कांग्रेस पर हमला, दलित राजनीति को लेकर दी बड़ी चेतावनी

कांशीराम जयंती पर मायावती ने कांग्रेस की 'दलित विरोधी' नीतियों का पर्दाफाश करते हुए बड़ा राजनीतिक भूकंप ला दिया है। मायावती ने चेतावनी दी है कि दलितों को गुमराह करने वाली पार्टियों को आने वाले समय में भारी कीमत चुकानी होगी। क्या बसपा फिर से अपने पुराने अंदाज में वापसी कर रही है?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 14, 2026

UP Politics: लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती के अवसर पर कांग्रेस पार्टी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने बीएसपी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और कांशीराम के अनुयायियों से कांग्रेस के प्रति सतर्क रहने की अपील की। मायावती का कहना है कि कांग्रेस की दलित-विरोधी सोच और मानसिकता के कारण ही बहुजन समाज पार्टी की स्थापना करनी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि दलित समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कांशीराम ने जिस आंदोलन की शुरुआत की थी, उसे कमजोर करने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। मायावती ने कहा कि बीएसपी समर्थकों को इन राजनीतिक चालों को समझना चाहिए और अपनी पार्टी की विचारधारा के प्रति सजग रहना चाहिए।

राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी

मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लखनऊ में आयोजित कांशीराम जयंती कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने कांशीराम के सामाजिक और राजनीतिक योगदान की सराहना की। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि यदि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू आज जीवित होते, तो कांशीराम को कांग्रेस पार्टी से मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिल सकता था। राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और मायावती ने कांग्रेस के इस रुख पर सवाल उठाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी।

मायावती ने कांग्रेस पर लगाए ऐतिहासिक आरोप

मायावती ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सर्वविदित है कि कांग्रेस पार्टी ने लंबे समय तक केंद्र की सत्ता में रहने के बावजूद दलितों के सबसे बड़े नेता और भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को उचित सम्मान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में अंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित करने में भी देरी की। मायावती ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस ने बाबा साहेब को ही उचित सम्मान नहीं दिया, तो वह कांशीराम को किस प्रकार सम्मान दे सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह रवैया दलित समाज के प्रति उसकी वास्तविक सोच को दर्शाता है।

कांशीराम के निधन पर शोक न मनाने का आरोप

बसपा सुप्रीमो ने यह भी आरोप लगाया कि जब कांशीराम का निधन हुआ था, उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, लेकिन राज्य स्तर पर भी कोई राजकीय शोक घोषित नहीं किया गया। मायावती ने कहा कि यह घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि उस समय भी दलित नेताओं और उनके योगदान को उचित सम्मान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि आज वही राजनीतिक दल कांशीराम के नाम का उपयोग करके राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।

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बीएसपी को कमजोर करने की कोशिशों का आरोप

मायावती ने अपने बयान में यह भी कहा कि कई राजनीतिक दल और कुछ संगठन कांशीराम के नाम और उनकी विरासत का इस्तेमाल करके दलित समाज को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दलित संगठन और पार्टियां भी अन्य राजनीतिक दलों के प्रभाव में आकर बीएसपी को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। मायावती ने कहा कि कांशीराम ने जिस उद्देश्य से बहुजन समाज पार्टी का गठन किया था, उसे कमजोर करने के लिए तरह-तरह के राजनीतिक हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इन कोशिशों को समझें और सतर्क रहें।

बीएसपी कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम सफल बनाने की अपील

मायावती ने अपने संदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आग्रह किया कि वे 15 मार्च 2026 को कांशीराम की जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के जरिए कांशीराम के विचारों और उनके संघर्ष को याद किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कांशीराम ने 1984 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की थी। इस पार्टी का उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और धार्मिक अल्पसंख्यकों को एकजुट कर एक मजबूत राजनीतिक ताकत बनाना था। मायावती ने कहा कि आज भी बीएसपी उसी विचारधारा और मिशन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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