Mathura Boat Accident: मथुरा के केशीघाट पर हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। शुक्रवार को पैंटून पुल के पीपे और मोटरबोट की टक्कर के बाद यमुना में कई श्रद्धालु डूब गए थे। अब तक राहत और बचाव दल द्वारा 12 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि अभी भी चार लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए मोटरबोट चालक और पैंटून पुल के ठेकेदार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।
जिलाधिकारी ने इस पूरे मामले की जांच एडीएम वित्त डॉ. पंकज वर्मा को सौंपी है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी। रविवार सुबह एक और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
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राहत कार्य जारी, लापता लोगों की तलाश
हादसे के बाद से ही राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया जा रहा है। लगभग 20 मोटरबोट के जरिए यमुना में 14 किलोमीटर तक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। गोताखोर लगातार नदी के अलग-अलग हिस्सों में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। शनिवार को एक शव मिलने के बाद रविवार को भी एक और शव बरामद हुआ, लेकिन अब भी चार लोग लापता हैं।
इस हादसे में पंजाब के लुधियाना के जगराओं निवासी भजन गायक लवी बहल का परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। उन्होंने अपनी मां और भाई के शव लेकर घर वापसी की है। उनके परिवार और रिश्तेदारी के कुल आठ लोगों की इस हादसे में मौत हो गई।
कैसे हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, भजन गायक लवी बहल 132 श्रद्धालुओं के साथ मोगा, श्री मुक्तसर साहिब और लुधियाना से धार्मिक यात्रा पर मथुरा आए थे। शुक्रवार दोपहर श्रद्धालुओं का एक समूह मोटरबोट के जरिए केशीघाट से यमुना पार कर देवराहा बाबा की समाधि के दर्शन के लिए जा रहा था।
उसी दौरान नदी के बीच पैंटून पुल को जोड़ने का कार्य चल रहा था। तेज हवा के कारण पुल का एक पीपा और मोटरबोट आपस में टकरा गए, जिससे नाव पलट गई। नाव में कुल 38 लोग सवार थे, जो यमुना में गिर गए।
लापरवाही बनी हादसे की वजह
प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि इस हादसे के पीछे गंभीर लापरवाही थी। पुलिस के अनुसार मोटरबोट चालक ने श्रद्धालुओं के कहने के बावजूद नाव को बीच नदी से वापस नहीं मोड़ा। तेज हवा के बावजूद नाव को आगे बढ़ाया गया, जिससे टक्कर हो गई।
इसके अलावा नाव में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई गई थीं और किसी के पास भी सुरक्षा उपकरण जैसे लाइफ जैकेट नहीं थे। इन सभी कारणों से हादसा और भी गंभीर हो गया।
बचाव कार्य और चुनौतियां
गोताखोरों के मुताबिक, तेज बहाव के कारण कई शव नदी में बहकर दूर तक चले जाते हैं और कई बार रेत में दब जाते हैं, जिससे उन्हें ढूंढना मुश्किल हो जाता है। इसी कारण राहत दल संभावित स्थानों पर नदी के तल की गहन जांच कर रहा है।
प्रशासन ने मोटरबोट की मदद से पानी में हलचल पैदा कर रेत में दबे शवों को बाहर निकालने का प्रयास भी किया है। शनिवार को माणिक टंडन का शव देवराहा बाबा घाट के पास बरामद हुआ।
जांच और आगे की कार्रवाई
घटना को लेकर प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि पुल निर्माण के दौरान संबंधित अधिकारी मौके पर क्यों मौजूद नहीं थे और नाव संचालन की अनुमति कैसे दी गई। जिलाधिकारी सीपी सिंह ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। यह हादसा न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि सुरक्षा नियमों के पालन की आवश्यकता को भी एक बार फिर सामने लाता है।










