US Israel Iran Conflict : ‘हफ्तों में खत्म होगा सैन्य अभियान’, मार्को रुबियो का बड़ा बयान, जमीनी सेना की जरूरत नहीं

फ्रांस में जी7 देशों की बैठक के बाद मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका और इजरायल का संयुक्त अभियान उम्मीद से तेज चल रहा है। उन्होंने साफ किया कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और मिसाइल ठिकानों को तबाह करने के लिए जमीनी सेना भेजने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा अवैध 'टोल' वसूलने की कोशिशों पर दुनिया को आगाह भी किया है।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 28, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

US Israel Iran Conflict :  पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने पहली बार अपनी सैन्य रणनीति को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि ईरान के विरुद्ध चलाया जा रहा सैन्य अभियान बहुत लंबा नहीं खिंचेगा। फ्रांस में आयोजित जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक के बाद रुबियो ने वैश्विक मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि यह ऑपरेशन “महीनों नहीं, बल्कि हफ्तों” में अपने तार्किक अंत तक पहुँच सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि अमेरिकी सेना अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय सीमा से पहले या उसके आसपास हासिल करने में सक्षम है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि रुबियो ने फिलहाल ईरान के भीतर बड़े पैमाने पर जमीनी सेना उतारने की आवश्यकता से इनकार किया है।

पेंटागन की हलचल: मरीन और एयरबोर्न सैनिकों की तैनाती ने बढ़ाई चिंता

भले ही विदेश मंत्री मार्को रुबियो जमीनी युद्ध की संभावनाओं को कमतर आंक रहे हों, लेकिन युद्ध के मैदान से आ रही तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ‘पेंटागन’ ने हजारों की संख्या में मरीन और एयरबोर्न सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैनिकों का पहला बड़ा दल मार्च 2026 के अंत तक एक विशाल एम्फीबियस (जल-थल) युद्धपोत के जरिए रणनीतिक क्षेत्र में पहुँच जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हवाई हमलों से ईरान के हौसले पस्त नहीं हुए, तो अमेरिका इन विशिष्ट सैनिकों का उपयोग सीमित जमीनी कार्रवाई या रणनीतिक ठिकानों पर कब्जे के लिए कर सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप का ‘डेडलाइन’ कूटनीति: ईरान को 10 दिनों का अल्टीमेटम

युद्ध को निर्णायक मोड़ पर पहुँचाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली अपनाई है। ट्रंप ने ईरान को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) को अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए खोलने हेतु 10 दिन की सख्त समय सीमा दी है। उन्होंने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में रास्ता नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के संपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाएगा। इसके साथ ही, ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के माध्यम से तेहरान को एक 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भी भेजा है। इस प्रस्ताव में यूरेनियम संवर्धन को तत्काल रोकने और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करने जैसी कड़ी शर्तें रखी गई हैं।

ईरान का सख्त रुख: “हमलों के बीच बातचीत संभव नहीं”

अमेरिकी प्रस्तावों और धमकियों के जवाब में ईरान ने झुकने के बजाय संघर्ष जारी रखने का संदेश दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट किया कि जब तक उनके देश पर बमबारी जारी है, तब तक किसी भी प्रकार की वार्ता करना अस्वीकार्य है। अराघची ने चेतावनी दी कि ईरान हर हमले का दोगुना ताकत के साथ जवाब देगा और अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। तेहरान के इस अड़ियल रुख ने कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को फिलहाल धुंधला कर दिया है, जिससे युद्ध के और अधिक हिंसक होने का खतरा बढ़ गया है।

खौफनाक आंकड़े: हजारों मौतें और बढ़ता मानवीय संकट

इस जारी जंग ने दोनों पक्षों को भारी मानवीय क्षति पहुँचाई है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, ईरान में अब तक 1900 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों की संख्या 20 हजार के पार पहुँच गई है। युद्ध की आग ने रिहायशी इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना को भी नुकसान उठाना पड़ा है; संघर्ष में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और 300 से अधिक घायल हुए हैं। यदि युद्ध अगले कुछ हफ्तों तक और खिंचता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके परिणाम अत्यंत विनाशकारी हो सकते हैं।

2