हाई कोर्ट से मनजिंदर लालपुरा को राहत, 11 साल पुराने मारपीट मामले में रिहाई; आपसी समझौते से पलटा कोर्ट का निर्णय

चंडीगढ़  पंजाब के खडूर साहिब से AAP के MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा के हाईकोर्ट से बरी होने पर राजनीति शुरू हो गई है। BJP के पंजाब प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि लालपुरा को भले ही 'समझौते' के तहत बरी कर दिया हो लेकिन पीड़िता के साथ खुलेआम अन्याय और हमला हुआ था। अदालत ने वर्ष 2013 में दर्ज मारपीट और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाए गए दोषसिद्धि और सजा के फैसले को रद्द करते हुए लालपुरा सहित अन्य सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया

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Published On :

मार्च 31, 2026

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चंडीगढ़ 

पंजाब के खडूर साहिब से AAP के MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा के हाईकोर्ट से बरी होने पर राजनीति शुरू हो गई है। BJP के पंजाब प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि लालपुरा को भले ही 'समझौते' के तहत बरी कर दिया हो लेकिन पीड़िता के साथ खुलेआम अन्याय और हमला हुआ था।

अदालत ने वर्ष 2013 में दर्ज मारपीट और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाए गए दोषसिद्धि और सजा के फैसले को रद्द करते हुए लालपुरा सहित अन्य सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पीड़ित पक्ष और आरोपियों के बीच आपसी समझौता हो चुका है। इसी समझौते को आधार बनाते हुए हाई कोर्ट ने पूरे मामले का पुनर्मूल्यांकन किया और पाया कि अब इस विवाद को आगे बढ़ाना न्याय के हित में नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब दोनों पक्ष विवाद को समाप्त करने पर सहमत हैं, तो ऐसे में सजा को बरकरार रखने का औचित्य नहीं रह जाता।

बताया जाता है कि वर्ष 2013 में दर्ज इस मामले में आरोप था कि महिला के साथ मारपीट की गई और एससी-एसटी एक्ट के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई के बाद मनजिंदर सिंह लालपुरा समेत अन्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपियों ने हाई कोर्ट का रुख किया था, जहां लंबे समय तक मामला विचाराधीन रहा।

हाई कोर्ट ने अपने ताजा आदेश में कहा कि समझौते की परिस्थितियों और मामले के तथ्यों को देखते हुए ट्रायल कोर्ट का निर्णय टिकाऊ नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि इस प्रकार के मामलों में, जहां पक्षकारों के बीच आपसी सहमति बन चुकी हो, वहां न्यायिक विवेक का प्रयोग करते हुए राहत दी जा सकती है। इस फैसले के बाद लालपुरा सहित अन्य आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही सभी की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

बता दें कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 13 साल पुराने मामले में कल लालपुरा समेत सभी लोगों को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने मारपीट और एससी-एसटी एक्ट मामले में तरनतारन कोर्ट के 4 साल की कैद की सजा को रद्द कर दिया। तरनतारन कोर्ट ने 10 सितंबर 2025 को यह सजा सुनाई थी। जिसके बाद लालपुरा को गिरफ्तार कर लिया गया था। वह अभी तरनतारन जेल में हैं।

इस सजा के खिलाफ लालपुरा समेत 12 आरोपी हाईकोर्ट पहुंचे थे। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पीड़ित पक्ष और दोषियों के बीच 4 फरवरी 2026 को आपसी समझौता हो चुका है। इसी समझौते को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब दोनों पक्ष विवाद को सुलझाने पर सहमत हैं, तो ऐसे में सजा को बरकरार रखने का औचित्य नहीं रह जाता।

यह पूरा मामला 2013 का है। उस समय विधायक लालपुरा टैक्सी ड्राइवर थे। उन पर शादी में आई युवती के साथ मारपीट करने का आरोप लगा था। युवती ने टैक्सी ड्राइवरों पर छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया था।

 

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