Manipur Protest: मणिपुर में फिर तेज हुआ विरोध, SoO समझौता रद्द करने और विस्थापितों की वापसी की मांग

मणिपुर में जातीय तनाव के बीच एक बार फिर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। इंफाल में हुई रैली में SoO समझौता रद्द करने और विस्थापितों की वापसी की मांग उठी। हालिया हमले के बाद बढ़े आक्रोश ने राज्य में तनाव को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

नवम्बर 1, 2026

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Manipur Protest : मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय संघर्ष और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। राज्य की राजधानी इंफाल में शनिवार को हजारों लोगों ने रैली निकालकर उग्रवादी संगठनों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते को रद्द करने की मांग की। इसके साथ ही हिंसा के कारण अपने घरों से विस्थापित हुए लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने राज्य के मूल निवासियों की सुरक्षा और स्थायी शांति बहाल करने पर जोर दिया।

COCOMI की रैली में पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के लोग शामिल

यह रैली मणिपुर इंटीग्रिटी पर समन्वय समिति यानी COCOMI की ओर से आयोजित की गई थी। इसमें पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों से आए विभिन्न समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर राज्य में शांति, न्याय और सुरक्षा की मांग की। रैली में SoO समझौते को समाप्त करने और विस्थापित परिवारों को उनके घरों में सुरक्षित बसाने के नारे लगाए गए। आयोजकों ने इसे अलग-अलग समुदायों की चिंताओं को सामने रखने का साझा प्रयास बताया।

नगा संगठनों ने भी किया समर्थन, चंदेल और सेनापति में निकले मार्च

इंफाल में आयोजित प्रदर्शन को कई नगा संगठनों का भी समर्थन मिला। इन संगठनों से जुड़े नागरिक समूहों ने चंदेल और सेनापति जिलों में भी मार्च और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए। नगा संगठनों ने भी SoO समझौते को समाप्त करने की मांग उठाई। उनका आरोप है कि कुकी-जो उग्रवादी समूह हिंसा की घटनाओं में शामिल रहे हैं। हालांकि, ये आरोप प्रदर्शनकारी संगठनों के दावे हैं। इस तरह मणिपुर के अलग-अलग क्षेत्रों में एक ही समय पर विरोध कार्यक्रमों के जरिए सुरक्षा और विस्थापन का मुद्दा उठाया गया।

मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष में 306 लोगों की मौत

मणिपुर में मई 2023 से घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ी क्षेत्रों के कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष जारी है। इस हिंसा ने राज्य के सामाजिक और सुरक्षा हालात को प्रभावित किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, संघर्ष में अब तक कम से कम 306 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, इस साल फरवरी से कुकी और नगा समूहों के बीच हुई झड़पों में भी करीब 50 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। अलग-अलग समुदायों के बीच तनाव के कारण सामान्य जनजीवन और आपसी विश्वास बहाल करना चुनौती बना हुआ है।

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14 मैतेई पुरुषों पर कथित हमले के बाद बढ़ा आक्रोश

राज्य में हालिया विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह 14 मैतेई पुरुषों पर हुआ कथित घात लगाकर हमला भी है। रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद कई इलाकों में नाराजगी बढ़ी और लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। इसी घटनाक्रम के बीच इंफाल सहित दूसरे जिलों में भी रैलियां आयोजित की गईं। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

विस्थापित परिवारों की सुरक्षित वापसी और सुरक्षा व्यवस्था पर जोर

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सरकार से विस्थापित परिवारों की घर वापसी के लिए ठोस व्यवस्था करने की मांग की। उनका कहना था कि प्रभावित लोगों को तभी वापस बसाया जाना चाहिए, जब उनकी सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा के पर्याप्त इंतजाम हों। प्रदर्शनकारियों ने राज्य के मूल निवासियों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देने की अपील की। मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा के कारण बड़ी संख्या में परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। ऐसे में पुनर्वास और सुरक्षित वापसी का मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।

SoO समझौते पर विवाद से शांति बहाली की चुनौती बढ़ी

सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस समझौता सरकार और कुकी उग्रवादी संगठनों के बीच हिंसा रोकने तथा बातचीत का रास्ता तैयार करने के उद्देश्य से किया गया था। हालांकि, मई 2023 में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद इस समझौते को लेकर विवाद बढ़ा है। मणिपुर में कई संगठन इसे समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, जबकि राज्य में शांति बहाली के लिए अलग-अलग समुदायों के बीच भरोसा कायम करना भी जरूरी है। मौजूदा प्रदर्शनों ने एक बार फिर साफ किया है कि सुरक्षा, जवाबदेही और विस्थापितों के पुनर्वास जैसे मुद्दे मणिपुर संकट के केंद्र में बने हुए हैं।

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