Mani Shankar Aiyar: ‘राहुल गांधी नेतृत्व छोड़ें’, मणिशंकर अय्यर ने क्षेत्रीय क्षत्रपों को आगे करने की वकालत की

कांग्रेस के कद्दावर नेता मणिशंकर अय्यर ने एक ऐसा धमाका किया है जिसने गांधी परिवार के समर्थकों को चौंका दिया है। अय्यर का तर्क है कि अगर भाजपा को हराना है, तो राहुल गांधी को पर्दे के पीछे जाकर राज्यों के ताकतवर चेहरों को मोर्चा सौंपना होगा। क्या यह कांग्रेस के अंत की शुरुआत है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 23, 2026

Mani Shankar Aiyar:  कांग्रेस के वरिष्ठ और अक्सर अपने बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर पार्टी के भीतर और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) में हलचल पैदा कर दी है। अय्यर ने सीधे तौर पर राहुल गांधी को सुझाव दिया है कि उन्हें विपक्षी गठबंधन के नेतृत्व से पीछे हट जाना चाहिए। उनके अनुसार, राहुल गांधी को गठबंधन की कमान किसी क्षेत्रीय क्षत्रप जैसे ममता बनर्जी, एम.के. स्टालिन, अखिलेश यादव या तेजस्वी यादव को सौंप देनी चाहिए। अय्यर का मानना है कि इन नेताओं के पास गठबंधन की बारीकियों को समझने और उसे समय देने की अधिक क्षमता है, जिससे ‘इंडिया’ ब्लॉक की जड़ें और मजबूत हो सकेंगी।

ममता बनर्जी के बिना अधूरा है गठबंधन: अय्यर का तर्क

अय्यर ने गठबंधन के भविष्य पर बात करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “ममता दीदी के बिना ‘INDIA’ अलायंस का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। वे इस गठबंधन की स्वाभाविक नेता हैं।” अय्यर के अनुसार, राहुल गांधी को इस पद पर बने रहने की कोशिश करने के बजाय छोटी और प्रभावी क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं को आगे लाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि स्टालिन या अखिलेश जैसे नेताओं के पास गठबंधन चलाने के लिए अधिक समय और स्थानीय पकड़ है, जो आगामी चुनावों में बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार करने के लिए आवश्यक है।

गठबंधन में आंतरिक खींचतान और नेतृत्व का संकट

मणिशंकर अय्यर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी खेमे में पहले से ही राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर असंतोष की खबरें छन-छनकर बाहर आ रही हैं। ममता बनर्जी ने हाल के दिनों में गठबंधन से एक तरह की दूरी बना रखी है, वहीं उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और बिहार में तेजस्वी यादव भी राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर बहुत उत्साहित नजर नहीं आ रहे हैं। क्षेत्रीय दलों के नेताओं को लगता है कि कांग्रेस का वर्चस्व वाला रवैया गठबंधन की एकता में बाधा बन रहा है। अय्यर की टिप्पणी ने इन्हीं दबी हुई आवाजों को एक मंच प्रदान कर दिया है।

कांग्रेस आलाकमान की तीखी प्रतिक्रिया: मणिशंकर पर पलटवार

अय्यर के इस बयान ने कांग्रेस के भीतर भी तीखी नाराजगी पैदा कर दी है, विशेषकर पश्चिम बंगाल इकाई में। कांग्रेस महासचिव सुमन रॉय चौधरी ने अय्यर की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे उनकी ‘निजी राय’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अय्यर लंबे समय से सक्रिय राजनीति और निर्णय लेने की प्रक्रिया से दूर हैं। चौधरी ने उन पर कटाक्ष करते हुए कहा, “क्या मणिशंकर जी को पता नहीं है कि ममता बनर्जी पर्दे के पीछे से उसी भाजपा की मदद कर रही हैं जिसके खिलाफ यह गठबंधन लड़ रहा है?” बंगाल कांग्रेस ने साफ़ कर दिया कि अय्यर का बयान पार्टी की आधिकारिक लाइन से मेल नहीं खाता।

आगामी चुनावों और विपक्षी एकता पर प्रभाव

मणिशंकर अय्यर की इस सलाह ने बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस और टीएमसी (TMC) के बीच के तनाव को और बढ़ा दिया है। रणनीतिकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व को लेकर इसी तरह की बयानबाजी जारी रही, तो बीजेपी के खिलाफ बनाया गया यह मोर्चा बिखर सकता है। अय्यर का सुझाव भले ही गठबंधन को समावेशी बनाने की दृष्टि से दिया गया हो, लेकिन कांग्रेस के प्रति उनके इस रवैये ने पार्टी के भीतर ही उन्हें अलग-थलग कर दिया है। अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे इस आंतरिक कलह को कैसे सुलझाते हैं।

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