Mandi Municipal Election: पूर्व मंत्री के फैसले से बिगड़ा खेल, मंडी में निर्दलीय प्रत्याशी ने मारी बाजी

मंडी नगर निगम चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला, जहां पूर्व मंत्री के फैसले ने पूरा चुनावी समीकरण बदल दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ टिकट विवाद था या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक खेल छिपा था।

पूर्व मंत्री के फैसले से बिगड़ा खेल

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 31, 2026

Mandi Municipal Election: मंडी नगर निगम चुनाव के नतीजों ने इस बार कई राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। सबसे बड़ा उलटफेर वार्ड नंबर एक खलियार में देखने को मिला, जहां कांग्रेस की बागी और निर्दलीय उम्मीदवार अलकनंदा हांडा ने भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों को करारी शिकस्त दी। उनकी जीत ने पूरे चुनावी माहौल को चौंका दिया और बड़े नेताओं के दावों को गलत साबित कर दिया।

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टिकट विवाद से शुरू हुई बगावत

इस सीट पर शुरुआत में कांग्रेस के भीतर ही बड़ा विवाद देखने को मिला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कथित तौर पर अलकनंदा हांडा को टिकट देने के पक्ष में थे, लेकिन पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर के हस्तक्षेप के कारण टिकट किसी और को दे दिया गया। बताया जाता है कि यह निर्णय उनके पारिवारिक रिश्ते और ‘भतीजे’ से जुड़ी सियासत के कारण प्रभावित हुआ।

टिकट से वंचित होने के बाद अलकनंदा हांडा ने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया और जनता ने उन्हें भारी समर्थन देकर विजयी बनाया। इस जीत ने कांग्रेस और भाजपा दोनों के समीकरण बिगाड़ दिए।

नेला वार्ड में राजनीतिक विरासत कायम

वार्ड नंबर चार नेला में एक बार फिर राजनीतिक परिवार का प्रभाव देखने को मिला। यहां स्वर्गीय सांसद गोपी राम के परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनकी पुत्रवधू नर्वदा ने शानदार जीत दर्ज की। इससे पहले उनके पति राजेंद्र मोहन इस सीट से पार्षद रह चुके थे। इस बार सीट महिला आरक्षित होने के कारण नर्वदा को उम्मीदवार बनाया गया और मतदाताओं ने एक बार फिर परिवार की राजनीतिक विरासत पर भरोसा जताया।

पड्डल वार्ड में पूर्व अध्यक्ष को करारी हार

पड्डल वार्ड इस चुनाव का सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला माना जा रहा था। यहां पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार नीलम शर्मा को भाजपा प्रत्याशी निर्मल वर्मा ने हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया। इस हार को कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि नीलम शर्मा की उम्मीदवारी काफी मजबूत मानी जा रही थी। निर्मल वर्मा की रणनीति और आक्रामक प्रचार ने इस मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया।

मंगवाईं वार्ड में परिवारवाद को नकारा

मंगवाईं वार्ड में कांग्रेस को परिवारवाद की राजनीति भारी पड़ गई। पार्टी ने यहां पूर्व पार्षद योगराज की पत्नी को टिकट दिया था, लेकिन जनता ने इस निर्णय को स्वीकार नहीं किया। भाजपा की युवा उम्मीदवार कृष्णा ने मजबूत प्रचार अभियान और स्थानीय मुद्दों पर फोकस करते हुए जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार रजनी चंद्रा को बड़े अंतर से हराकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए।

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कुल मिलाकर बड़ा राजनीतिक संदेश

मंडी नगर निगम चुनाव के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता अब पारंपरिक राजनीति, परिवारवाद और मजबूत राजनीतिक समीकरणों से आगे बढ़कर नए और स्वतंत्र चेहरों को भी मौका दे रही है। निर्दलीय उम्मीदवारों की सफलता और कई बड़े नेताओं की हार ने इस चुनाव को बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक बना दिया है।