Mamata Banerjee: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद को लेकर चुनाव आयोग को पत्र लिखते हुए विरोधी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी को किसी भी प्रकार की अतिरिक्त मोहलत न देने की मांग की है। उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि उनके द्वारा पहले ही प्रस्तुत किए जा चुके जवाब पर जल्द फैसला लिया जाए और मामले को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचा जाए। ममता का कहना है कि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बावजूद विरोधी पक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया गया है।
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संगठनात्मक विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूल
टीएमसी के भीतर यह विवाद तब गहरा गया, जब 2 जुलाई 2026 को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बताते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया। इस गुट का दावा था कि 22 जून को आयोजित विशेष अधिवेशन में संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे, जिनकी जानकारी आयोग को दे दी गई है। साथ ही उन्होंने संगठनात्मक बदलावों को आधिकारिक मान्यता देने की मांग भी रखी।
इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर विवाद और तेज हो गया। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को सही ठहराने में जुट गए, जिससे मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया।
आयोग ने दोनों पक्षों से मांगा था स्पष्टीकरण
विवाद सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर अपने-अपने दावे और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। आयोग ने दोनों गुटों से यह भी कहा था कि वे अपने जवाब की प्रति एक-दूसरे को भी उपलब्ध कराएं, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने 6 जुलाई 2026 को अपना जवाब आयोग के समक्ष जमा कर दिया था। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के गुट को 10 जुलाई 2026 की शाम 5:30 बजे तक अपना पक्ष रखने का समय दिया गया था।
समयसीमा बीतने के बाद भी जवाब नहीं आने पर उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने अपने ताजा पत्र में कहा कि तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी विरोधी गुट की ओर से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने लिखा कि 10 जुलाई के बाद दो दिन से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद आयोग की ओर से भी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग की यह चुप्पी विरोधी पक्ष को अतिरिक्त अवसर प्रदान करती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, इससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि विरोधी गुट को अनावश्यक राहत दी जा रही है।
जल्द निर्णय लेने की अपील
अपने पत्र के अंत में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया कि उनके द्वारा दाखिल किए गए जवाब पर शीघ्र विचार किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि ऋतब्रत बनर्जी के गुट को आगे किसी प्रकार का अतिरिक्त समय न दिया जाए, क्योंकि निर्धारित समय पहले ही समाप्त हो चुका है। अब इस पूरे मामले में सभी की निगाहें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं। आयोग का फैसला न केवल टीएमसी के संगठनात्मक विवाद की दिशा तय करेगा, बल्कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।










