Bengal Law Ministry: पश्चिम बंगाल की राजनीति में दीदी के नाम से मशहुर ममता बनर्जी ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा प्लान तैयार किया है. सोमवार को उन्होंने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि वे सत्ता और संगठन पर अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देंगी. राज्य के न्यायिक और कानून विभाग की जिम्मेदार खुद संभाल कर उन्होंने न केवल विपक्ष को चौंकाया बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर जवाबदेही का एक मानक स्थापित कर दिया है.
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सचिवालय ‘नबन्ना’ से बड़ा आदेश
बताते चले कि, राज्य सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के बाद अब न्यायिक मामलों में मुख्यमंत्री का सीधा हस्तक्षेप देखने को मिलेगा। अब तक यह विभाग मलॉय घटक के पास था, जो आसनसोल से आते हैं और पार्टी के पुराने वफादार माने जाते हैं। हालांकि, उन्हें अब केवल श्रम विभाग तक सीमित कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी कानून विभाग के पुराने ढर्रे से खुश नहीं थी, विशेषकर उन मामलों में जहाँ राज्य सरकार को अदालत में बार-बार रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ रहा था।
‘दीदी’ का नया सुरक्षा कवच
आपको बता दे कि, पिछले कुछ वर्षों में बंगाल सरकार को संदेशखाली से लेकर शिक्षक भर्ती घोटाले तक कई मोर्चों पर CBI और ED के साथ कानूनी संघर्ष करना पड़ा है। कई मौकों पर राज्य के वकीलों और कानून विभाग के बीच तालमेल की कमी दिखी। अब, कानून मंत्रालय को अपने पास रखकर ममता बनर्जी ने यह सुनिश्चित किया है कि:
- केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ कानूनी रणनीति सीधे उनके मार्गदर्शन में बनेगी।
- महत्वपूर्ण मुकदमों में वरिष्ठ वकीलों के चयन और ब्रीफिंग पर उनका सीधा नियंत्रण होगा।
- विभाग के भीतर किसी भी प्रकार की सूचना के लीक होने की गुंजाइश खत्म होगी।
क्या यह ममता बनर्जी का ‘वन वुमन शो’ है?
इस फेरबदल के साथ ही ममता बनर्जी के पास अब गृह, स्वास्थ्य, सूचना एवं संस्कृति, भूमि एवं भू-राजस्व और अब कानून जैसे सबसे शक्तिशाली विभाग हो गए हैं। कैबिनेट में शक्तियों का केंद्रीकरण और प्रशासनिक सख्ती यह दर्शाती है कि 2026 के चुनाव से पहले वे किसी भी मंत्री पर निर्भर रहने के बजाय खुद कमान संभालना चाहती हैं। आईटी (IT) और औद्योगिक पुनर्निर्माण जैसे विभाग भी फिलहाल उन्हीं के पास हैं, जो राज्य के विकास और छवि सुधारने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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