Mamata Banerjee EC Attack: ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, बंगाल में SIR को बताया राजनीतिक साजिश

Mamata Banerjee vs EC: दिल्ली की सड़कों पर उतरी ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है। 'SIR' यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को उन्होंने बीजेपी की चाल बताया, जिसके जरिए अल्पसंख्यकों और गरीबों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। क्या बंगाल चुनाव से पहले यह सबसे बड़ा खेल है? जानिए पूरी सच्चाई!

Mamata Banerjee EC Attack

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 3, 2026

Mamata Banerjee EC Attack: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को देश की राजधानी दिल्ली में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न चिह्न लगाए। ममता बनर्जी ने विशेष रूप से ‘एसआईआर’ (SIR) के मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेरा। उनके साथ कुछ लोग भी मौजूद थे, जिन्हें उन्होंने एसआईआर का “पीड़ित” बताया और उनके माध्यम से अपनी बात को मजबूती से रखा।

चुनावी प्रक्रिया और आयोग की चुप्पी पर तीखे सवाल

ममता बनर्जी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि बंगाल में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के मुद्दे पर उन्होंने चुनाव आयोग को कुल छह पत्र लिखे हैं, लेकिन अब तक आयोग की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। टीएमसी प्रमुख ने कहा, “हमारी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से व्यक्तिगत रूप से मिला, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल सड़क पर ही नहीं, बल्कि सदन के भीतर भी विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

जिंदा लोगों को मृत घोषित करने का सनसनीखेज आरोप

मुख्यमंत्री ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि एसआईआर के दौरान बंगाल में कई जीवित मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया है। उन्होंने अपने पीछे बैठे लोगों की ओर इशारा करते हुए उनसे हाथ उठवाकर दिखाया कि वे जीवित हैं, जबकि सरकारी दस्तावेजों में उन्हें मृत बता दिया गया है। ममता ने सवाल उठाया कि 2002 के बाद अब चुनाव से ठीक पहले बंगाल में एसआईआर की क्या आवश्यकता थी? उन्होंने इसे विपक्ष शासित राज्यों—तमिलनाडु, केरल और बंगाल—को निशाना बनाने की एक सुनियोजित साजिश करार दिया।

पर्यवेक्षकों की नियुक्ति पर भाजपा से सांठगांठ का दावा

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त अधिकारियों की निष्पक्षता पर भी संदेह जताया। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ‘इलेक्टोरल ऑब्जर्वर’ के रूप में ऐसे अधिकारियों को नियुक्त किया गया है, जो भाजपा के प्रति झुकाव रखते हैं। इसके साथ ही ‘माइक्रो ऑब्जर्वर’ की नियुक्ति को भी उन्होंने अवैध बताया। सीएम के अनुसार, यह सब बदले की भावना से किया जा रहा है ताकि उन लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दरकिनार किया जा सके जो मौजूदा सरकार के समर्थक हैं।

बुद्धिजीवियों और प्रसिद्ध हस्तियों को नोटिस देने की निंदा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने समाज के प्रतिष्ठित लोगों को मिल रहे नोटिसों पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बताया कि नोबेल विजेता अमर्त्य सेन और प्रसिद्ध कवि जय गोस्वामी जैसी हस्तियों को भी तलब किया जा रहा है। अमर्त्य सेन के मामले में उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता की उम्र के अंतर जैसे तुच्छ कारणों को आधार बनाया जा रहा है। उन्होंने सेवानिवृत्त आईटी अधिकारी सीमा खन्ना का उदाहरण देते हुए कहा कि उन पर भी दबाव बनाया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

अदालती कार्यवाही और विपक्ष शासित राज्यों की एकजुटता

ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि एसआईआर और चुनावी विसंगतियों की यह समस्या केवल उन्हीं राज्यों में देखी जा रही है जहां भाजपा की सरकार नहीं है। उन्होंने कहा कि असम या पूर्वोत्तर के राज्यों में ऐसी कोई समस्या नहीं है। ममता ने अंत में जानकारी दी कि यह पूरा मामला अब अदालत के अधीन है और सुनवाई की तारीख भी तय हो चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायपालिका इस मामले में हस्तक्षेप करेगी, लेकिन साथ ही उन्होंने देश की जनता को जागरूक रहने का संदेश भी दिया।

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