West Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा के खिलाफ अपने तेवर और भी सख्त कर लिए हैं। पश्चिम बर्धमान के पांडबेश्वर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए ममता ने सीधे तौर पर राज्य की महिलाओं से अपील की कि वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए मोर्चा संभालें। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि मतदान या मतगणना के दिन कोई भी बाहरी शक्ति या बल प्रयोग के जरिए डराने-धमकाने की कोशिश करता है, तो डरे नहीं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “यदि कोई फोर्स अप्लाई करने की कोशिश करे, तो घर में जो कुछ भी हथियार या सामान है, उसे लेकर बाहर निकल आएं और एकजुट होकर मुकाबला करें।”
महंगाई और ईंधन की कीमतों पर केंद्र सरकार को घेरा
अपने संबोधन के दौरान ममता बनर्जी ने महंगाई को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की तुलना पूर्ववर्ती सरकारों से करते हुए कहा कि पहले गैस सिलेंडर की कीमत महज 400 रुपये हुआ करती थी, जो आज बढ़कर 1100 रुपये (सिंगल) और 2100 रुपये (डबल) तक पहुंच गई है। उन्होंने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई। ममता ने केंद्र द्वारा जारी ‘अलर्ट’ पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह इसका असली मतलब बखूबी समझती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार देश में फिर से लॉकडाउन लगाने की साजिश रच रही है ताकि जनता को घरों में बंद कर ‘वोटबंदी’ की जा सके।
लॉकडाउन और वोटबंदी की साजिश का सनसनीखेज आरोप
मुख्यमंत्री ने जनता को आगाह किया कि केंद्र सरकार कोरोना काल की तरह एक बार फिर लॉकडाउन लगाने का विचार कर रही है। ममता के अनुसार, इस कदम का असली मकसद जनता को घर पर बिठाकर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनना है। उन्होंने कहा, “ये लोग जनता का नाम मतदाता सूची से काटना चाहते हैं और उन्हें घरों में कैद कर चुनाव जीतना चाहते हैं।” उन्होंने याद दिलाया कि अगर बंगाल की जनता 2021 के विधानसभा चुनाव में डटकर संघर्ष कर सकती है, तो वह किसी भी विपरीत परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने इसे बंगाल की अस्मिता की लड़ाई करार दिया।
TMC बनाम भाजपा: कौरवों और पांडवों के बीच का महाभारत
आगामी चुनावी मुकाबले को ममता बनर्जी ने एक धार्मिक और ऐतिहासिक मोड़ देते हुए इसे ‘महाभारत’ जैसा युद्ध बताया। उन्होंने भाजपा की तुलना ‘कौरवों’ से की, जो अधर्म की राह पर हैं, जबकि टीएमसी को ‘पांडवों’ की तरह धर्म रक्षक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर विपक्षी गढ़ों में मतदाताओं को निशाना बना रहे हैं। ममता ने मांग की कि सभी पूरक मतदाता सूचियां तुरंत प्रकाशित की जाएं और जिन लोगों के नाम सूची से गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें टीएमसी की ओर से मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी।
मतदाता सूची में विसंगतियों और चुनावी पारदर्शिता पर सवाल
अपनी पार्टी के उम्मीदवार नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती के पक्ष में प्रचार करते हुए ममता ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘तार्किक विसंगतियों’ के बहाने जानबूझकर मतदाताओं के नाम जोड़े या हटाए जा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि बंगाल की जनता इस तरह के किसी भी धांधली को बर्दाश्त नहीं करेगी। ममता ने अपनी पार्टी की महिला विंग और ‘मां-माटी-मानुष’ के समर्थकों को जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि वे बूथ स्तर पर सतर्क रहें और किसी भी गड़बड़ी की सूचना तुरंत साझा करें, क्योंकि यह लड़ाई बंगाल के भविष्य को बचाने की है।
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