Mallikarjun Kharge : राज्यसभा में खड़गे की टिप्पणी पर विवाद, भाजपा ने सौंपा विशेषाधिकार हनन नोटिस

राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस सौंपा है, जिससे संसद में तनाव बढ़ गया है और दोनों दलों के बीच टकराव की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है

Mallikarjun Kharge

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 18, 2026

Mallikarjun Kharge : राज्यसभा के भीतर हाल ही में हुई एक बहस ने एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। सदन में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई कुछ विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा के छह वरिष्ठ सांसदों ने खड़गे के व्यवहार और उनके द्वारा उपयोग की गई भाषा पर आपत्ति जताते हुए राज्यसभा में उनके खिलाफ ‘विशेषाधिकार हनन नोटिस’ (Privilege Motion) दाखिल किया है। यह नोटिस इस आरोप के साथ दिया गया है कि खड़गे की टिप्पणियां न केवल असंसदीय थीं, बल्कि वे प्रधानमंत्री के पद की गरिमा के विरुद्ध भी थीं। इस घटना के बाद संसद के ऊपरी सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है।

संसदीय गरिमा और परंपराओं के उल्लंघन का गंभीर आरोप

भाजपा सांसदों ने अपने नोटिस में तर्क दिया है कि सदन में विपक्ष के नेता का पद अत्यंत जिम्मेदार होता है, लेकिन मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस पद की मर्यादा का ध्यान न रखते हुए प्रधानमंत्री के बारे में अपमानजनक और अनर्गल बातें कही हैं। शिकायतकर्ताओं का मानना है कि खड़गे के इस कृत्य से न केवल सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है, बल्कि यह संसदीय परंपराओं और शिष्टाचार का भी सीधा उल्लंघन है। भाजपा सांसदों का यह स्पष्ट आरोप है कि सदन के अंदर किसी भी सदस्य द्वारा प्रधानमंत्री जैसे उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए ऐसी अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना स्वीकार्य नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने राज्यसभा के सभापति से खड़गे के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने लिया संज्ञान

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भाजपा सांसदों द्वारा दिए गए विशेषाधिकार हनन नोटिस को तुरंत स्वीकार कर लिया है। सभापति ने इस मामले को आगे की गहन जांच और परीक्षण के लिए ‘विशेषाधिकार समिति’ के पास भेज दिया है। अब यह समिति पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा करेगी। समिति यह देखेगी कि क्या वाकई खड़गे के शब्दों ने सदन की विशेषाधिकारों का हनन किया है और क्या उनकी टिप्पणी संसदीय नियमों की परिधि से बाहर थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, जो राज्यसभा में भविष्य के लिए एक मिसाल बन सकती है।

राजनीतिक टकराव और भविष्य की चुनौतियां

यह घटना संसद में चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान राजनीतिक टकराव को और बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल खड़गे का समर्थन करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे संसदीय अनुशासन और मर्यादाओं को बनाए रखने की एक अनिवार्य प्रक्रिया के रूप में देख रही है। इस विवाद के कारण सदन की कार्यवाही में बार-बार व्यवधान आ रहा है और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों पर चर्चा प्रभावित हो रही है। विशेषाधिकार समिति की जांच के दौरान विपक्षी खेमा और सत्तापक्ष के बीच वाकयुद्ध और तेज होने की संभावना है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि संसदीय समिति इस मामले में क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या मल्लिकार्जुन खड़गे को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है। यह मामला संसद की कार्यप्रणाली और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम संसदीय मर्यादा के बीच के संतुलन को फिर से चर्चा के केंद्र में ले आया है।

Read More  :  Odisha Textbook Controversy : ओडिशा की नई किताबों में मिलीं 1,678 गलतियां, मुख्यमंत्री माझी ने उठाया सख्त कदम