Malda Violence: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सुप्रीम कोर्ट (SC) के कड़े आदेश पर मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्य में जुटे न्यायिक अधिकारियों (जजों) को बंधक बनाने की दुस्साहसिक घटना पर सीआईडी (CID) ने बेहद कड़ा एक्शन लिया है। आज अहले सुबह इस पूरी साजिश और हिंसक घटना के मुख्य मास्टरमाइंड वकील मोफक्करुल इस्लाम को पुलिस ने धर दबोचा। ख़ुफ़िया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी को बागडोगरा हवाई अड्डे (Bagdogra Airport) पर उस समय घेराबंदी करके गिरफ्तार किया गया, जब वह राज्य से बाहर भागने की फिराक में फ्लाइट पकड़ने की कोशिश कर रहा था।
नॉर्थ बंगाल एडीजी का सख्त रुख
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए नॉर्थ बंगाल के एडीजी जयरामन ने कड़े शब्दों में कहा, “हमने भीड़ को उकसाने और न्यायिक अधिकारियों को घेरने के लिए लोगों को भड़काने के गंभीर आरोप में मोफक्करुल इस्लाम को बागडोगरा एयरपोर्ट से हिरासत में लिया है। हम कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वाली ऐसी किसी भी अराजक गतिविधि की इजाजत बिल्कुल नहीं देंगे। सीआईडी इस बात की गहराई से तफ्तीश करेगी कि यह पूरा ड्रामा पहले से प्लान किया गया था या अचानक हुआ। इस खौफनाक घटना के बाद हमने सभी कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की चाक-चौबंद सुरक्षा मुहैया करा दी है। इस मामले में अब तक कुल 35 उपद्रवियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।”
चुनाव आयोग का सख्त फैसला
इस बीच एक और बहुत बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। चुनाव आयोग (ECI) ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची के काम में लगे न्यायिक अफसरों के घेराव की इस संगीन घटना की जांच सीधे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। भारत निर्वाचन आयोग ने यह कड़ा फैसला इस संवेदनशील मामले में सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत यानी उच्चतम न्यायालय के कड़े निर्देश और हस्तक्षेप के बाद लिया है। आयोग के सूत्रों ने साफ कर दिया है कि एनआईए की एक विशेष टीम शुक्रवार तक पश्चिम बंगाल पहुंचकर मामले की डायरी अपने हाथ में ले लेगी। आयोग ने सख्त लहजे में कहा कि वे लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या गुंडागर्दी को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद एक्शन
माननीय सुप्रीम कोर्ट के कल के ही कड़े निर्देशों का बिना देर किए अनुपालन करते हुए चुनाव आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा ने एनआईए के महानिदेशक (DG) को मालदा हिंसा की जांच के लिए गुरुवार को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में शीर्ष अदालत के उस सख्त निर्देश का स्पष्ट हवाला दिया गया है, जिसमें चुनाव आयोग को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या फिर एनआईए (NIA) जैसी केंद्रीय एजेंसी से अविलंब करवाने का हुक्म दिया गया था। कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य की ममता सरकार और स्थानीय पुलिस बैकफुट पर आ गई है।
मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
आपको बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने मालदा जिले के एक बीडीओ (BDO) मुख्यालय पर बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने और उनके खिलाफ हिंसक घेराव के मामले में कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मिली सीक्रेट और पुख्ता सूचना के आधार पर स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लिया है। ये सभी पीड़ित न्यायिक अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के ही निर्देश पर मतदाता सूची से जुड़े दावों और आपत्तियों की बहुत ही पारदर्शी तरीके से जांच के लिए ऑन-ड्यूटी तैनात किये गये थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी घटना को अदालत की घोर अवमानना (Contempt of Court) का गंभीर मामला करार दिया है और अब इस मामले पर अगली बड़ी सुनवाई आगामी 6 अप्रैल को होने जा रही है।










