Malaysia Crisis: ‘मुझे सत्ता से हटाना चाहते हैं यहूदी संगठन’, मलेशियाई पीएम का विदेशी मीडिया पर बड़ा हमला

मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने संसद में सनसनीखेज दावा किया है कि एक अंतरराष्ट्रीय जनसंपर्क फर्म और विदेशी मीडिया आउटलेट्स मिलकर उनकी सरकार को गिराने की साजिश रच रहे हैं। पीएम ने इन गतिविधियों के पीछे यहूदी संगठनों और भ्रष्टाचार की जांच से घबराए प्रभावशाली लोगों का हाथ होने का संकेत दिया है।

Malaysia Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 3, 2026

Malaysia Crisis:  ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच अब दक्षिण-पूर्व एशियाई देश मलेशिया से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने आरोप लगाया है कि एक शक्तिशाली यहूदी संगठन उनके देश की सत्ता पलटने और सरकार गिराने की साजिश रच रहा है। इब्राहिम के अनुसार, यह साजिश न केवल राजनीतिक स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से भी रची जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी ताकतें मलेशिया की स्थिरता को भंग करने की कोशिश कर रही हैं, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।

मीडिया और विपक्ष का गठजोड़: संसद में अनवर इब्राहिम का तीखा हमला

मलेशियाई अखबार ‘द स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार (3 मार्च 2026) को संसद को संबोधित करते हुए अनवर इब्राहिम ने कहा कि उनकी सरकार को अस्थिर करने के लिए एक त्रिकोणीय गठजोड़ काम कर रहा है। इसमें एक यहूदी समूह, ‘ब्लूमबर्ग’ जैसा अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान और मलेशिया के कुछ स्थानीय विपक्षी नेता शामिल हैं। प्रधानमंत्री का दावा है कि ये समूह अंतरराष्ट्रीय मीडिया में मलेशिया के खिलाफ नकारात्मक खबरें फैला रहे हैं ताकि अमेरिका और पश्चिमी देशों का ध्यान आकर्षित किया जा सके और उनकी सरकार के खिलाफ माहौल बनाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तख्तापलट की साजिश की गहन जांच होगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा।

ईरान और गाजा का समर्थन बना कारण: वैचारिक युद्ध की चेतावनी

प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का मानना है कि उन्हें निशाना बनाए जाने का मुख्य कारण उनका अंतरराष्ट्रीय रुख है। उन्होंने कहा, “मैंने गाजा में हो रहे अत्याचारों और ईरान पर हुए हमलों के खिलाफ हमेशा कड़ा रुख अपनाया है। क्या मानवता के लिए बोलना गुनाह है? अगर यहूदी समूह मुझे इसी कारण निशाना बना रहे हैं, तो मैं पीछे नहीं हटूंगा।” गौरतलब है कि मलेशिया उन पहले देशों में से था जिसने अयातुल्ला खामेनेई की हत्या की कड़ी निंदा की थी। इब्राहिम ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार विदेशी दबाव के आगे नहीं झुकेगी और फिलिस्तीन व ईरान के मुद्दे पर अपना समर्थन जारी रखेगी।

मलेशिया का जनसांख्यिकीय ढांचा और यहूदी आबादी का रहस्य

मलेशिया एक प्रमुख मुस्लिम बहुल राष्ट्र है, जहां इस्लाम आधिकारिक धर्म है। आंकड़ों के अनुसार, यहां की कुल आबादी में 63.5 प्रतिशत मुसलमान हैं। इसके बाद बौद्ध (18.7%), ईसाई (9.1%) और हिंदू (6.1%) समुदाय का स्थान आता है। दिलचस्प बात यह है कि मलेशिया में यहूदियों की आबादी नगण्य (लगभग शून्य) है। इसके बावजूद, प्रधानमंत्री द्वारा यहूदी समूहों पर सरकार गिराने का आरोप लगाना इस बात की ओर इशारा करता है कि वे देश के भीतर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संगठनों और ‘लॉबिंग’ समूहों की ओर इशारा कर रहे हैं।

विपक्ष पर साधा निशाना: 2020-21 की साजिशों का दिया हवाला

अपने संबोधन के दौरान अनवर इब्राहिम ने देश के विपक्षी दलों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या सत्ता के लालच में विपक्ष अब विदेशी शक्तियों और यहूदी समूहों के साथ हाथ मिला रहा है? उन्होंने याद दिलाया कि 2020 और 2021 में भी मलेशिया में इसी तरह के राजनीतिक अस्थिरता के प्रयास हुए थे, जिससे देश की छवि खराब हुई थी। उन्होंने जनता से अपील की कि वे ऐसे तत्वों से सावधान रहें जो बाहरी ताकतों के इशारे पर देश के लोकतंत्र को कमजोर करना चाहते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा और जांच का वादा

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी अवैध प्रयास को विफल करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। जांच के बाद सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाएंगे ताकि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सके। यह मामला न केवल मलेशिया की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा बल्कि आने वाले समय में इसके और इजराइल-अमेरिका के संबंधों में भी भारी तनाव पैदा कर सकता है।

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