Makar Sankranti 2026: सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं और सभी का अपना महत्व भी होता है। लेकिन मकर संक्रांति को बेहद ही खास माना जाता है, जो कि धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 14 जनवरी और 15 जनवरी दोनों ही दिन मनाया जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन से खरमास का समापन हो जाता है और शुभ कार्यों का आरंभ हो जाता है। यह पर्व ऋतु परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है और इसे दान पुण्य, स्नान और आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर भी माना गया है।
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धार्मिक तौर पर तिल को बेहद ही पवित्र माना गया है, पुराणों में तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के शरीर से हुई थी। इसी कारण तिल का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति पर तिल का दान और सेवन करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

मकर संक्रांति के अवसर पर तिल-गुड़ के लड्डू, तिलकुट और अन्य व्यंजन बनाए जाते हैं। इसका कारण यह है कि तिल का सेवन शरीर को ऊर्जा और गर्मी प्रदान करता है, जिससे शीत ऋतु के प्रभाव को कम किया जा सकता है। तिल का सेवन न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी इसे शुभ माना जाता है।
काले तिल का विशेष महत्व
हालांकि तिल सफेद और काले दोनों प्रकार के होते हैं, लेकिन मकर संक्रांति पर काले तिल का दान विशेष फलदायी माना गया है। काले तिल को नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है। यह पितृ दोष, ग्रह दोष और विशेष रूप से शनि दोष के शमन में सहायक होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि काले तिल का दान करने से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और दुर्भाग्य दूर होता है।
शनि देव और काले तिल का संबंध
शनि देव को कर्मफलदाता कहा जाता है। उनका संबंध न्याय, अनुशासन और कर्म से है। काले रंग को शनि देव का प्रिय रंग माना जाता है और इसी कारण काला तिल उन्हें अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए काले तिल, तिल का तेल और काले वस्त्र का दान करना अत्यंत शुभ होता है। इससे शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य अशुभ प्रभावों में कमी आती है।
जीवन में स्थिरता और सुख-समृद्धि
मकर संक्रांति के दिन काले तिल का दान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है। दरिद्रता और कष्ट दूर होते हैं और शनि देव प्रसन्न होकर शुभ फल प्रदान करते हैं। इससे जीवन में स्थिरता, सुख-समृद्धि और शांति आती है।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।










