Makar Sankranti 2026 : पूर्वांचल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में मकर संक्रांति का दिन अत्यंत पावन माना जाता है। इस पर्व को यहां आम बोलचाल में खिचड़ी पर्व कहा जाता है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर इस उत्सव का प्रमुख केंद्र होता है, जहां मकर संक्रांति के अवसर पर लाखों श्रद्धालु भगवान गोरक्षनाथ को खिचड़ी अर्पित करने के लिए पहुंचते हैं। यह पर्व केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतिनिधित्व करता है।
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति से लेकर मुगल काल तक, खिचड़ी का सफर
खिचड़ी क्यों है भगवान गोरक्षनाथ को प्रिय

मान्यता है कि भगवान गोरक्षनाथ को खिचड़ी अत्यंत प्रिय है। गोरखपुर को उनकी तपोभूमि माना जाता है और प्राचीन काल से यहां मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है और श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप खिचड़ी वितरित की जाती है। खिचड़ी को सात्विक भोजन माना जाता है, जो साधना, संयम और समानता का प्रतीक है।
ज्वाला देवी मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा
लोककथाओं के अनुसार हिमाचल प्रदेश स्थित ज्वाला देवी मंदिर में जो जल निरंतर उबलता रहता है, वह भगवान गोरक्षनाथ के लिए खिचड़ी पकाने हेतु माना जाता है। कथा है कि एक बार भगवान गोरक्षनाथ ज्वाला देवी मंदिर में भोजन के लिए पहुंचे, जहां उन्हें तामसी भोजन परोसा गया। उन्होंने वह भोजन ग्रहण करने से इनकार कर दिया और देवी से जल गर्म रखने का आग्रह करते हुए भिक्षा मांगने निकल पड़े।
भिक्षा मांगते-मांगते वे गोरखपुर पहुंचे, लेकिन उनका खप्पर कभी पूरा नहीं भर पाया। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर को अपनी साधना स्थली बनाया और यहीं निवास करने लगे। तभी से ज्वाला देवी के उबलते जल और गोरखपुर में खिचड़ी अर्पित करने की परंपरा को आपस में जुड़ा हुआ माना जाता है।
नेपाल के राजा और गोरखनाथ पीठ का संबंध
गोरखनाथ मंदिर का नेपाल से गहरा और ऐतिहासिक संबंध रहा है। मान्यता है कि नेपाल के शाह वंश की स्थापना भगवान गोरक्षनाथ के आशीर्वाद से हुई थी। इसी कारण नेपाल के राजा गोरक्षनाथ को अपना गुरु मानते हैं और गोरखनाथ पीठ के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं।
मकर संक्रांति के दिन एक विशेष परंपरा का निर्वहन किया जाता है। सबसे पहले गोरक्षपीठाधीश्वर भगवान गोरक्षनाथ को खिचड़ी अर्पित करते हैं। इसके पश्चात नेपाल नरेश की ओर से दूसरी खिचड़ी चढ़ाई जाती है। इसके बाद आम श्रद्धालुओं को खिचड़ी अर्पित करने की अनुमति दी जाती है। यह परंपरा आज भी पूरी निष्ठा के साथ निभाई जाती है।
मकर संक्रांति पर लगता है भव्य मेला

मकर संक्रांति के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन होता है। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए जाते हैं।
श्रद्धालुओं का मानना है कि खिचड़ी पर्व समानता, सेवा और भाईचारे का संदेश देता है। यही कारण है कि खिचड़ी को भगवान गोरक्षनाथ का सबसे प्रिय भोग माना जाता है और यह पर्व पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।










