चेतना सैनी की अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग में बड़ी जीत, मिस्र की मुक्केबाज को दी मात

गुरुग्राम. गुरुग्राम की चेतना सैनी ने मिस्र की राजधानी काहिरा में इसरा को हराकर अपनी 11वीं पेशेवर मुक्केबाजी फाइट जीती। वे सुपर बेंटमवेट वर्ग में देश में नंबर एक रैंकिंग पर हैं। गुरुग्राम की चेतना सैनी ने मिस्र की राजधानी काहिरा में शुक्रवार रात आयोजित मुकाबले में इसरा को शिकस्त देकर अपनी 11वीं पेशेवर मुक्केबाजी फाइट जीत ली। सुपर बेंटमवेट वर्ग में देश में नंबर एक रैंकिंग हासिल कर चुकीं चेतना ने इस जीत से गुरुग्राम और देश का मान बढ़ाया है। विदेशी धरती पर मिली यह सफलता वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है। काहिरा का मुकाबला चेतना

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Published On :

अक्टूबर 31, 2026

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गुरुग्राम.

गुरुग्राम की चेतना सैनी ने मिस्र की राजधानी काहिरा में इसरा को हराकर अपनी 11वीं पेशेवर मुक्केबाजी फाइट जीती। वे सुपर बेंटमवेट वर्ग में देश में नंबर एक रैंकिंग पर हैं। गुरुग्राम की चेतना सैनी ने मिस्र की राजधानी काहिरा में शुक्रवार रात आयोजित मुकाबले में इसरा को शिकस्त देकर अपनी 11वीं पेशेवर मुक्केबाजी फाइट जीत ली।

सुपर बेंटमवेट वर्ग में देश में नंबर एक रैंकिंग हासिल कर चुकीं चेतना ने इस जीत से गुरुग्राम और देश का मान बढ़ाया है। विदेशी धरती पर मिली यह सफलता वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है। काहिरा का मुकाबला चेतना के लिए चुनौतीपूर्ण था। अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी के सामने अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए उन्होंने आत्मविश्वास के साथ रिंग में कदम रखा और दबाव के बीच बेहतर प्रदर्शन करते हुए इसरा को पराजित किया। यह उनके पेशेवर मुक्केबाजी करियर की 11वीं फाइट थी।

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फरुख नगर के स्कूल में मिली शुरुआती प्रेरणा
चेतना की इस अंतरराष्ट्रीय सफलता की नींव फरुखनगर स्थित एसडीएस स्कूल में पड़ी थी। उस समय वह आठवीं कक्षा की छात्रा थीं और उनकी उम्र महज 14 वर्ष थी। स्कूल में मुक्केबाजी की सुविधा शुरू ही हुई थी और नए खेल के प्रति उनकी रुचि जगी तो उन्होंने अभ्यास शुरू कर दिया। शुरुआत में यह महज एक खेल सीखने की कोशिश थी, लेकिन जल्द ही मुक्केबाजी उनके जीवन का लक्ष्य बन गई। अभ्यास शुरू किए अभी दो महीने ही हुए थे कि उन्हें सब जूनियर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में खेलने का अवसर मिल गया। चेतना ने इस मौके को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच बनाया और स्वर्ण पदक जीत लिया। कम उम्र में मिली इस उपलब्धि ने उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती दी। स्कूल के अभ्यास से शुरू हुआ सफर आगे बढ़ता गया और उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर सुपर बेंटमवेट वर्ग में देश की नंबर एक रैंकिंग हासिल की।

मैरी कॉम से मिली मुक्केबाजी की प्रेरणा
चेतना के खेल जीवन को दिशा देने में महान भारतीय मुक्केबाज मैरी कॉम की उपलब्धियों का बड़ा योगदान रहा है। उनके संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय सफलताओं से प्रभावित होकर चेतना ने भी दुनिया भर में देश का नाम रोशन करने का सपना देखा। मैरी कॉम की तरह मुक्केबाजी के माध्यम से अपनी पहचान बनाने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा ऊंचा करने का संकल्प उनके लिए प्रेरणा बना। काहिरा में मिली जीत उसी संकल्प की एक और मजबूत कड़ी है।

छोटे शहरों की बेटियों के लिए प्रेरणा
चेतना का सफर उन बेटियों के लिए भी प्रेरणा है, जो छोटे शहरों और कस्बों में रहकर बड़े सपने देखती हैं। उनकी कहानी बताती है कि सफलता के लिए शुरुआत का बड़ा होना जरूरी नहीं, बल्कि लक्ष्य बड़ा और उसे हासिल करने का हौसला मजबूत होना चाहिए। गुरुग्राम में 14 साल की उम्र में मुक्केबाजी के दस्ताने पहनने वाली चेतना ने शायद ही कल्पना की होगी कि एक दिन उनके मुक्कों की गूंज मिस्र की धरती तक पहुंचेगी। लेकिन आंखों में बड़ा सपना और उसे पूरा करने का हौसला हो तो छोटी सी शुरुआत भी अंतरराष्ट्रीय पहचान का रास्ता बन जाती है।

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