Major fire tragedies in India: भारत के इतिहास में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं, जिन्होंने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। इन हादसों में न केवल अनगिनत जिंदगियां राख हुईं, बल्कि इन्होंने सरकारी व्यवस्था, सुरक्षा मानकों और प्रशासन की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। यहाँ भारत के 10 सबसे बड़े और विनाशकारी अग्निकांडों का विवरण है, जिन्होंने देश को झकझोर कर रख दिया।
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सिनेमा, स्कूल और सार्वजनिक स्थलों की त्रासदियां
उपहार सिनेमा अग्निकांड (1997): दिल्ली के उपहार सिनेमा में 13 जून 1997 को फिल्म ‘बॉर्डर’ के दौरान लगी आग में 59 लोगों ने दम तोड़ दिया। सुरक्षा नियमों की घोर अनदेखी का यह मामला वर्षों तक कानूनी लड़ाई का केंद्र रहा।
कुंभकोणम स्कूल अग्निकांड (2004): 16 जुलाई 2004 को तमिलनाडु के एक स्कूल की फूस की छत में लगी आग में 94 मासूम बच्चे काल के गाल में समा गए। इस घटना ने देशभर के स्कूलों में आग से सुरक्षा के इंतजामों को सवालों के घेरे में ला दिया।
मेरठ विक्टोरिया पार्क अग्निकांड (2006): मेरठ की एक प्रदर्शनी में 10 अप्रैल 2006 को लगी भीषण आग ने 100 से अधिक लोगों की जान ले ली। यह आयोजन स्थल पर सुरक्षा प्रोटोकॉल के अभाव का एक बड़ा उदाहरण था।
व्यावसायिक इमारतें और अस्पतालों का दंश
स्टीफन कोर्ट अग्निकांड (2010): कोलकाता की ऐतिहासिक इमारत में 2010 में लगी आग ने 43 लोगों की जान ली। यह पुरानी इमारतों में अग्नि सुरक्षा के बुनियादी अभाव को दर्शाता है।
एएमआरआई अस्पताल अग्निकांड (2011): 9 दिसंबर 2011 को कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में लगी आग में 89 लोगों की मौत हो गई। इनमें ज्यादातर वे मरीज थे जो खुद को बचाने में असमर्थ थे। इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षा मानकों पर बड़ी बहस छेड़ दी थी।
आधुनिक दौर के कोचिंग हब और गेमिंग जोन का संकट
कमला मिल्स अग्निकांड (2017): मुंबई के पॉश इलाके में स्थित पब में लगी आग ने 14 लोगों की जान ले ली। इस हादसे ने रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को उजागर किया।
सूरत कोचिंग सेंटर अग्निकांड (2019): 24 मई 2019 को एक कोचिंग सेंटर में लगी आग ने 22 छात्रों की जान ले ली। कई छात्रों ने आग से बचने के लिए ऊंचाइयों से छलांग लगा दी थी।
मुंडका अग्निकांड (2022): दिल्ली की चार मंजिला इमारत में लगी आग में 27 लोग जिंदा जल गए। संकरी गलियां और सिंगल एग्जिट मार्ग बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बने।
राजकोट गेमिंग जोन अग्निकांड (2024): 25 मई 2024 को टीआरपी गेमिंग जोन में वेल्डिंग के दौरान लगी आग में 27 लोगों (जिसमें कई बच्चे थे) की मौत हो गई। यह पूरा केंद्र बिना किसी वैध फायर एनओसी के अवैध रूप से संचालित हो रहा था।
दिल्ली मालवीय नगर होटल अग्निकांड (2026): हाल ही में 3 जून 2026 को दिल्ली के होटल में लगी आग में 21 लोगों की मौत हुई। यह दुर्घटना फिर से यह साबित करती है कि कमर्शियल इमारतों में अग्नि सुरक्षा अब भी एक ‘अनदेखी’ चुनौती बनी हुई है।
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