‘ऑपरेशन चेकमेट’ की बड़ी कार्रवाई, 28 पंजाबी गिरफ्तार; हजारों ट्रक ड्राइवरों के भविष्य पर संकट

चंडीगढ़  अमेरिकी लंबी दूरी के ट्रकिंग उद्योग का अहम हिस्सा माने जाने वाले हजारों पंजाबी ट्रक ड्राइवरों के सामने अनिश्चितता का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस की जांच के दौरान अवैध या बिना वैध दस्तावेजों के पाए गए 17,000 ट्रक ड्राइवरों को अमेरिका ने डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा, ईरान में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक ईंधन बाजार भी प्रभावित हुआ है, जिससे रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं। सोमवार को 'ऑपरेशन चेकमेट' के तहत गिरफ्तार किए गए 52 लोगों में 28 पंजाबी शामिल हैं। पकड़े गए लोगों

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Published On :

जून 3, 2026

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चंडीगढ़ 

अमेरिकी लंबी दूरी के ट्रकिंग उद्योग का अहम हिस्सा माने जाने वाले हजारों पंजाबी ट्रक ड्राइवरों के सामने अनिश्चितता का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस की जांच के दौरान अवैध या बिना वैध दस्तावेजों के पाए गए 17,000 ट्रक ड्राइवरों को अमेरिका ने डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा, ईरान में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक ईंधन बाजार भी प्रभावित हुआ है, जिससे रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं।

सोमवार को 'ऑपरेशन चेकमेट' के तहत गिरफ्तार किए गए 52 लोगों में 28 पंजाबी शामिल हैं। पकड़े गए लोगों में 36 कमर्शियल ट्रक ड्राइवर हैं। यह अभियान इमिग्रेशन कानूनों को सख्ती से लागू करके सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और कमर्शियल वाहन चलाने वाले अवैध लोगों की पहचान के लिए चलाया गया है।

कैलिफोर्निया में कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर हुए बड़े संघीय और राज्य ऑडिट में पहचाने गए 17,000 अवैध अप्रवासी ट्रक ड्राइवरों में पंजाबियों, विशेषकर सिख समुदाय, की एक बड़ी संख्या शामिल है।

'ऑपरेशन चेकमेट' और प्रशासन की सख्ती
एरिजोना के युमा सेक्टर में अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन चेकमेट' के बारे में जानकारी देते हुए कार्यवाहक चीफ पेट्रोल एजेंट डस्टिन डब्ल्यू. कॉडल ने कहा, "यह अभियान अवैध रूप से रह रहे उन ड्राइवरों से सड़कों और समुदायों को सुरक्षित रखने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं।"

ट्रंप प्रशासन की सख्ती के बाद, कैलिफोर्निया के अधिकारियों ने उन प्रवासियों के हजारों कमर्शियल लाइसेंस रद्द करने शुरू कर दिए हैं, जिनकी कानूनी स्थिति समाप्त हो चुकी है। इसका सबसे ज्यादा असर कैलिफोर्निया, टेक्सास और अन्य प्रमुख ट्रकिंग हब में बसे पंजाबी समुदाय पर पड़ा है।

सिख ड्राइवरों में दहशत और आर्थिक चिंताएं
दिसंबर 2025 में द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दो प्रमुख दुर्घटनाओं और ट्रंप प्रशासन की सख्ती ने समुदाय में भारी चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट में बताया गया कि लंबी दूरी की ट्रकिंग सिख प्रवासियों के लिए हमेशा से एक बड़ा सहारा रही है, लेकिन हालिया नीतियों ने हालात पूरी तरह बदल दिए हैं।

उत्तरी अमेरिका में पंजाबी ट्रकिंग संघों के एक प्रतिनिधि ने कहा कि जिन ड्राइवरों ने सालों से इस उद्योग में अपना योगदान दिया है, वे अब दहशत में हैं। लॉस एंजिल्स टाइम्स में उत्पीड़न की आशंकाओं के बीच पंजाबी ट्रक ड्राइवर सुमित सिंह के हवाले से कहा गया, "महज एक व्यक्ति की गलती के कारण पूरे समुदाय को सजा नहीं मिलनी चाहिए।"

जनवरी 2026 में बेकर्सफील्ड में सिख ट्रक ड्राइवरों से मुलाकात के बाद अमेरिकी सीनेटर एडम शिफ ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था, "मैं परिवारों की आय और नौकरियों के नुकसान को लेकर बेहद चिंतित हूं। भले ही लोग यहां कानूनी रूप से रह रहे हों और उनके पास वर्क परमिट हो, लेकिन उन्हें हिरासत में लिए जाने या डिपोर्ट किए जाने का खतरा बना हुआ है।"

सिख कोलिशन के कार्यकारी निदेशक हरमन सिंह के अनुसार, अमेरिकी ट्रकिंग कार्यबल में पंजाबी सिखों की बड़ी हिस्सेदारी है और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर ड्राइवरों की कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है। एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में लगभग 1,50,000 सिख ट्रक ड्राइवर हैं, जो मुख्य रूप से पश्चिमी तट पर केंद्रित हैं।

युद्ध और महंगाई की दोहरी मार
इमिग्रेशन की सख्ती के साथ-साथ ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। अमेरिका में डीजल महंगा होने से स्वतंत्र रूप से काम कर रहे ट्रक ड्राइवरों के मुनाफे में भारी कमी आई है। इसके अलावा, जो पंजाबी ड्राइवर अमेरिका के साथ-साथ खाड़ी या मध्य पूर्व के मार्गों पर भी ट्रक चलाते थे, उनके लिए युद्ध की वजह से वे रास्ते भी बंद हो गए हैं। इस वजह से पंजाब में बैठे उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ गया है।

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