बड़ा प्रशासनिक विवाद, बंगाल ने MP में पकड़े गए 3,259 लोगों को बताया अपना नागरिक

भोपाल मध्य प्रदेश में पुलिस द्वारा संदिग्ध बांग्लादेशी के रूप में पिछले वर्ष चिह्नित किए गए 3,278 लोगों में से 19 के अलावा बाकी को बंगाल सरकार ने अपने राज्य का निवासी माना है। बंगाल सरकार ने स्वीकार किया है कि इन लोगों के [Aadhaar Redacted], राशन कार्ड और मतदाता परिचय पत्र उनके यहां से ही बने हैं। 19 लोगों के दस्तावेज को वैध नहीं माना था, इसलिए इन्हें बांग्लादेश भेजने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस ने नियमानुसार सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपा था। मुख्य सचिव और पुलिस टीमों की सक्रियता बता दें, केंद्र सरकार ने जून, 2025 में

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Published On :

अप्रैल 26, 2026

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भोपाल

मध्य प्रदेश में पुलिस द्वारा संदिग्ध बांग्लादेशी के रूप में पिछले वर्ष चिह्नित किए गए 3,278 लोगों में से 19 के अलावा बाकी को बंगाल सरकार ने अपने राज्य का निवासी माना है। बंगाल सरकार ने स्वीकार किया है कि इन लोगों के [Aadhaar Redacted], राशन कार्ड और मतदाता परिचय पत्र उनके यहां से ही बने हैं। 19 लोगों के दस्तावेज को वैध नहीं माना था, इसलिए इन्हें बांग्लादेश भेजने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस ने नियमानुसार सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपा था।

मुख्य सचिव और पुलिस टीमों की सक्रियता

बता दें, केंद्र सरकार ने जून, 2025 में सभी राज्यों से संदिग्ध बांग्लादेशियों की पहचान और उनके दस्तावेज का सत्यापन कराने के लिए कहा था। इसके बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन ने गृह व अन्य संबंधित विभागों और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें संदिग्धों को चिह्नित करने के तरीके व आगे की प्रक्रिया पर चर्चा हुई थी। सभी जिलों में थाना प्रभारियों को इन्हें चिह्नित करने की जिम्मेदारी दी गई। इसमें उनकी भाषा, काम आदि को आधार बनाया गया। अभियान में 3,278 लोगों को चिह्नित किया गया था।

बंगाल भेजी गईं पुलिस की 20 टीमें

संदिग्धों के दस्तावेज की पड़ताल के लिए मध्य प्रदेश से पुलिस की 20 टीमें बंगाल भेजी गई थीं। एक टीम ने तीन से चार जिलों में जाकर शासकीय कार्यालयों से दस्तावेज की पुष्टि की, जिनमें 3,259 को सही बताया गया। हालांकि, मध्य प्रदेश का गृह विभाग बंगाल सरकार द्वारा दस्तावेज को वैध ठहराए जाने को फिलहाल अंतिम नहीं मान रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फिर से सत्यापन कराया जा सकता है।

एमपी गृह विभाग दोबारा करा सकता है सत्यापन

दरअसल, आशंका यह रहती है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों ने बंगाल में आकर फर्जी तरीके से दस्तावेज न बनवा लिए हों। इसी कारण अधिकारियों का कहना है कि संदेह होने पर फिर सत्यापन कराया जाएगा। यह सतत चलने वाली प्रक्रिया है। प्रशासन का मानना है कि सुरक्षा के लिहाज से पहचान और दस्तावेजों की सत्यता की गहराई से जांच करना अनिवार्य है ताकि किसी भी प्रकार की घुसपैठ की आशंका को समाप्त किया जा सके।

 

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