Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि भगवान शिव और मां पार्वती के मिलन का पावन पर्व है। इस दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि माना जाता है कि इसी दिन महादेव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। साल 2026 में महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर 15 फरवरी की शाम 05:04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी की शाम 05:34 बजे तक रहेगी। यह दिन कल्याणकारी और नई ऊर्जा देने वाला माना जाता है, इसलिए भक्त विशेष श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखते हैं।
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर कितने बजे करें शिवलिंग का जलाभिषेक? जानें मुहूर्त और नियम
महाशिवरात्रि स्नान का शुभ समय

महाशिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना सबसे श्रेष्ठ माना गया है। सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे के बीच स्नान करना अत्यंत फलदायी रहता है। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करना उत्तम है, अन्यथा घर पर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें। इस समय मन को शांत रखें और शिवदेव से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। इस दिन मन में किसी के प्रति कोई कड़वाहट न रखें।
महाशिवरात्रि पूजा के शुभ मुहूर्त
मुख्य पूजा रात्रि के समय की जाती है। निशीथ काल पूजा का सबसे शुभ समय रात 12:09 बजे से 01:01 बजे तक माना गया है। यह 51 मिनट की अवधि साधना के लिए अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है। इसके अलावा चार प्रहर की पूजा शाम 06:11 बजे से अगले दिन सुबह 06:59 बजे तक की जा सकती है। सही समय पर की गई पूजा से जीवन में स्थिरता और मानसिक शक्ति बढ़ती है। यह समय महादेव की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
घर पर सरल पूजा विधि
घर पर शिवलिंग की पूजा के लिए पहले उसका अभिषेक करें। अभिषेक में कच्चा दूध, गंगाजल, शहद और घी का प्रयोग करना श्रेष्ठ रहता है। जलाभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। इसके बाद महादेव को सफेद फूल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें। ध्यान रखें कि बेलपत्र किसी भी तरह से कटा-फटा न हो। अंत में धूप और दीप जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। रात्रि जागरण और शिव चालीसा का पाठ करने से मानसिक बल और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। यह पूजा विधि सरल होने के साथ प्रभावी भी मानी जाती है।
महाशिवरात्रि व्रत के नियम और पारण

महाशिवरात्रि का व्रत पूरी श्रद्धा और नियम के साथ रखना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन और फलहार का सेवन श्रेष्ठ माना जाता है। नमक और अन्न से परहेज करना व्रत का महत्वपूर्ण नियम है। व्रत का पारण 16 फरवरी को सुबह 6:59 बजे से दोपहर 3:24 बजे के बीच किया जा सकता है। पारण से पहले जरूरतमंद को दान या दक्षिणा देना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से पूजा और व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।
महाशिवरात्रि व्रत रखने और पूजा विधि का पालन करने से महादेव की कृपा से जीवन में सुख, शांति और स्थिरता आती है तथा सभी बाधाओं को दूर करने में मदद मिलती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए व्रत और पूजा से मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति भी होती है।
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