Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर कयासों और राजनीतिक हलचलों का दौर शुरू हो गया है। हाल ही में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के नेताओं के बीच बढ़ती मुलाकातों ने राज्य के सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। ताजा घटनाक्रम में, शिर्डी लोकसभा क्षेत्र से शिवसेना (यूबीटी) के सांसद भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे ने आज शिंदे सरकार के कैबिनेट मंत्री उदय सामंत से मुलाकात की। राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया गया है कि इस विशेष बैठक का उद्देश्य केवल उनके लोकसभा क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा करना और कुछ निजी व प्रशासनिक कामकाज को आगे बढ़ाना था।
लगातार होती मुलाकातों से राजनीतिक कयास तेज
यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि पिछले कुछ दिनों में ऐसी कई मुलाकातें देखने को मिली हैं जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं। इससे ठीक एक दिन पहले, उद्धव गुट (यूबीटी) के एक और सांसद नागेश अस्तिकार ने भी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से सीधे मुलाकात की थी। इस बैठक में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण और लंबित स्थानीय मुद्दों को मुख्यमंत्री के सामने रखा। इसके अलावा, नासिक में आयोजित सांसद श्रीकांत शिंदे के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यूबीटी गुट के ही सांसद राजाभाऊ वाकचौरे की सक्रिय मौजूदगी ने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया।
इन लगातार होती बैठकों के बाद मुंबई से लेकर दिल्ली तक यह चर्चा आम हो गई है कि क्या भविष्य में उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसद पाला बदलकर शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। चूंकि महाराष्ट्र की राजनीति पहले भी बड़े उलटफेरों और ऐतिहासिक दल-बदल की गवाह रही है, इसलिए इन मुलाकातों के गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
सांसदों और शिंदे गुट की सफाई
हालांकि, इस पूरे मामले पर मचे सियासी घमासान के बीच शिंदे गुट और संबंधित सांसदों, दोनों की ओर से किसी भी तरह के राजनीतिक बदलाव या असंतोष की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया गया है। मुलाकातों में शामिल रहे सांसदों ने मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है कि इन बैठकों को विशुद्ध रूप से विकास कार्यों, स्थानीय समस्याओं के समाधान और अपने-अपने चुनाव क्षेत्र से जुड़े नागरिक मुद्दों तक ही सीमित देखा जाना चाहिए। उन्होंने पूरी दृढ़ता के साथ साफ किया है कि वे न तो उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ रहे हैं और न ही उनके मन में पार्टी बदलने या किसी अन्य दल में शामिल होने की कोई सुगबुगाहट या योजना है। शिंदे गुट के नेताओं ने भी इसे केवल एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत जनप्रतिनिधियों की सामान्य प्रशासनिक मुलाकात करार दिया है।
एनसीपी के दोनों धड़ों में भी बैठकों का दौर
शिवसेना के दोनों धड़ों में जारी इस उठापटक के बीच, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के भीतर भी सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। बुधवार को मुंबई में एनसीपी के दोनों प्रतिद्वंदी गुटों—शरद पवार और अजित पवार खेमे—द्वारा एक ही दिन बेहद अहम और आपात बैठकें बुलाने के ऐलान से राज्य का राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया। हालांकि, ताजा अपडेट के मुताबिक सुनेत्रा पवार (अजित पवार गुट) ने फिलहाल अपनी प्रस्तावित और होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक को अपरिहार्य कारणों से टालने का फैसला किया है।
दूसरी तरफ, देश और राज्य की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार ने आज सुबह 11 बजे मुंबई के प्रसिद्ध वाई. बी. चव्हाण सेंटर में अपने वफादार गुट की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस उच्च स्तरीय बैठक में महाराष्ट्र के मौजूदा नाजुक राजनीतिक हालात, जमीनी हकीकत और पार्टी की आगे की भविष्य की रणनीतियों पर गहन मंथन होने की पूरी संभावना है।
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