Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से बड़े राजनीतिक बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। राज्यसभा सांसद और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत ने दावा किया है कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार का दिल अभी भी अपने परिवार और शरद पवार के नेतृत्व वाली महाविकास आघाडी (एमवीए) से जुड़ा हुआ है। राउत के अनुसार, जल्द ही अजित पवार एमवीए में लौट सकते हैं और राजनीतिक समीकरण फिर बदल सकते हैं।
राउत का दावा: राकांपा के दो गुट अब पर्दे के पीछे एक
संजय राउत ने एनसीपी और पवार परिवार को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि राकांपा का वास्तविक विलय शरद पवार के नेतृत्व वाली मुख्य राकांपा में हो चुका है। उनके अनुसार, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों गुट ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह पर एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। यह तालमेल इस बात का सबूत है कि पर्दे के पीछे दोनों धड़े पहले ही एक हो चुके हैं।राउत ने अजित पवार की वर्तमान स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भले ही अजित पवार वर्तमान में महायुति सरकार का हिस्सा हैं, उनका मन और दिल अभी भी एमवीए से जुड़ा हुआ है। राउत ने कहा, “अजित पवार एक साथ दो नावों पर सवार नहीं हो सकते। अंततः वे शरद पवार के नेतृत्व वाली एमवीए में वापस आएंगे।”
जुलाई 2024 का घटनाक्रम और पार्टी विभाजन
गौरतलब है कि जुलाई 2024 में अजित पवार ने अपने समर्थक विधायकों के साथ तत्कालीन एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होकर राकांपा को दो हिस्सों में बांट दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने अजित पवार के गुट को असली राकांपा मानते हुए ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया, जबकि शरद पवार के गुट को राकांपा (एसपी) नाम और अलग चिन्ह मिला। इस विभाजन ने महाराष्ट्र की राजनीति को लंबे समय तक अस्थिर कर दिया था।संजय राउत ने केवल पवार परिवार पर ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा के रिश्तों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बीएमसी में मेयर पद को लेकर शिंदे भाजपा के रुख से नाराज हैं। राउत के अनुसार, दिल्ली का केंद्रीय नेतृत्व इस मसले पर किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है, जिससे महायुति के भीतर तनाव की स्थिति बनी हुई है।
स्थानीय निकाय चुनावों में राकांपा का गठबंधन
स्थानीय निकायों के चुनावों के दौरान राकांपा के विभिन्न गुट पहले ही गठबंधन कर चुके हैं। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनावों के लिए गुटों ने ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह पर मिलकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। आगामी 5 फरवरी को होने वाले तीसरे चरण के नगर निकाय चुनावों में भी दोनों गुट एक साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे।संजय राउत के बयान और स्थानीय निकायों में गुटों के तालमेल ने महाराष्ट्र की राजनीति में भविष्य की दिशा को लेकर नए संकेत दिए हैं। उनका तर्क है कि पवार परिवार का एक होना और अजित पवार का एमवीए में लौटना राज्य की राजनीतिक तस्वीर बदल सकता है। यह घटनाक्रम आगामी विधानसभा चुनावों और अन्य राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
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