Maharashtra Politics: देश की राजनीति में आगामी लोकसभा सीटों के पुनर्गठन यानी परिसीमन (Delimitation) को लेकर एक बड़ा मोड़ आता दिखाई दे रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष की ओर से राहत मिलने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार आगामी मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक को एक बार फिर संसद के पटल पर पेश कर सकती है।
इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले के एक हालिया बयान ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। सुले के बयान से यह साफ संकेत मिले हैं कि यदि विपक्ष की कुछ तार्किक शर्तों और चिंताओं को विधेयक में शामिल कर लिया जाता है, तो उनकी पार्टी संसद में इस बिल का समर्थन करने पर गंभीरता से विचार कर सकती है।
Haryana News: अब कागजी नहीं, कर्मचारियों को मिलेंगे सिर्फ डिजिटल ड्यूटी पास
सुप्रिया सुले का रुख: ‘सदन में बिल आने के बाद ही करेंगे अंतिम फैसला’
एनसीपी (एसपी) की प्रमुख नेता सुप्रिया सुले ने परिसीमन विधेयक को लेकर अपनी पार्टी की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान में इस बिल का अंतिम ड्राफ्ट या मसौदा उनके पास नहीं आया है। उन्होंने साफ किया कि जब यह विधेयक आधिकारिक तौर पर सामने आएगा, तब पार्टी इसका गहराई से अध्ययन करेगी और उसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
दक्षिण भारत की चिंता: सुप्रिया सुले ने जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन को लेकर एक बड़ी चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यदि केवल और केवल लोकसंख्या (Population) को ही आधार बनाकर सीटों का पुनर्गठन किया गया, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर दक्षिण भारत के राज्यों पर पड़ेगा। दक्षिण भारतीय राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतरीन काम किया है, ऐसे में केवल आबादी को आधार बनाने से उनके साथ घोर राजनीतिक अन्याय होगा।
विपक्ष को नहीं होगी आपत्ति?
विधेयक को लेकर एक बीच का रास्ता सुझाते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि यदि सरकार निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन विधेयक के तहत पूरे देश में लोकसभा सीटों की संख्या में वर्तमान सीटों के मुकाबले 50 प्रतिशत की एकसमान बढ़ोतरी का प्रावधान करती है, तो इस पर विपक्षी दलों को कोई खास आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
इंडिया गठबंधन से चर्चा: सुले ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस 50% बढ़ोतरी वाले विकल्प को आगे बढ़ाती है, तो वे सीधे तौर पर बिल का समर्थन करने की बजाय पहले अपने सहयोगियों यानी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के प्रमुख नेताओं के साथ टेबल पर बैठेंगी। सभी विपक्षी दलों से व्यापक विचार-विमर्श करने के बाद ही कोई साझा रुख तय किया जाएगा।
सर्वदलीय बैठक का हवाला: उन्होंने यह भी खुलासा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित हुई एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक के दौरान इस 50 फीसदी वाले विकल्प पर विस्तार से चर्चा हुई थी।
अन्य दलों का रुख: सुप्रिया सुले के अनुसार, इस फॉर्मूले पर केवल उनकी पार्टी ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में उनके सहयोगी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और कुछ अन्य प्रमुख विपक्षी दलों ने भी बेहद सकारात्मक और लचीला रुख दिखाया था। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि जब तक बिल का अंतिम आधिकारिक मसौदा सामने नहीं आ जाता, तब तक औपचारिक समर्थन की घोषणा नहीं की जा सकती।
अप्रैल में केंद्र सरकार ने संसद में क्या दिया था आश्वासन?
उल्लेखनीय है कि इसी साल अप्रैल (2026) में संसद के एक विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने परिसीमन विधेयक, 2026 के साथ-साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में पेश किया था। उस दौरान विपक्षी दलों ने इस पर भारी विरोध दर्ज कराया था। विपक्षी इंडिया अलायंस का आरोप था कि इस परिसीमन के जरिए केंद्र सरकार अपनी राजनीतिक सहूलियत के हिसाब से सीटों का निर्धारण करना चाहती है।
इस विवाद और विरोध के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में सरकार का रुख साफ करते हुए विपक्ष को आश्वस्त किया था कि देश के किसी भी राज्य, विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों के साथ रत्ती भर भी अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। अमित शाह ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया था कि परिसीमन विधेयक, 2026 से दक्षिणी राज्यों को नुकसान होने की बजाय बड़ा राजनीतिक लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया था कि वर्तमान में दक्षिण भारत के राज्यों से कुल 129 लोकसभा सांसद चुनकर आते हैं, लेकिन इस नए विधेयक के लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर सीधे 195 हो जाएगी। सरकार ने परिसीमन आयोग अधिनियम के मूल ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया है, बल्कि मौजूदा अधिनियम को बिल्कुल पूर्ण विराम (Full Stop) और अल्पविराम (Comma) तक दोहराया गया है। अब सुप्रिया सुले के इस नए बयान के बाद माना जा रहा है कि मानसून सत्र में इस बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति का कोई नया रास्ता निकल सकता है।
Haryana News: हरियाणा में निजी स्कूलों पर बड़ी कार्रवाई, शिक्षा विभाग ने जारी की सूची










