Maharashtra politics: महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव? NDA और NCP-SP को लेकर चर्चाएं

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत हैं। शरद पवार की एनसीपी-एसपी अब एमवीए (MVA) छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ गठबंधन करने जा रही है।

Maharashtra politics

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 17, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

Maharashtra politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है, जिसने महाविकास अघाड़ी (MVA) की नींव हिला दी है। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन करने का निर्णय लिया है। इस नई राजनीतिक व्यवस्था के तहत, शरद पवार गुट सीधे तौर पर एनडीए (NDA) में विलय नहीं करेगा, बल्कि महायुति गठबंधन के भीतर ही एकनाथ शिंदे की शिवसेना का समर्थन करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा।

नाबालिग के लिव-इन केस में HC सख्त, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी तय करेगी लड़की की कस्टडी

जयंत पाटील को मिल सकता है वित्त मंत्रालय

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस गठबंधन के पीछे एक विस्तृत ‘पावर शेयरिंग’ फॉर्मूला तैयार किया गया है। चर्चा है कि शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटील को राज्य सरकार में वित्त मंत्री का महत्वपूर्ण पद सौंपा जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि यह पद पहले एनसीपी के अजित पवार गुट के पास था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अजित पवार गुट के मुख्यधारा में रहने के बावजूद, शरद पवार गुट का शिंदे गुट के साथ आना भविष्य के सत्ता समीकरणों को पूरी तरह बदलने वाला है।

एनसीपी के दोनों गुटों के विलय में क्यों आई बाधा?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी चाहती थी कि शरद पवार और अजित पवार के गुट एक बार फिर एक साथ आ जाएं, ताकि पार्टी में एकता बनी रहे। हालांकि, यह राह इतनी आसान नहीं थी। अजित पवार गुट की सुनेत्रा पवार पार्टी में किसी भी प्रकार का पावर शेयरिंग नहीं चाहती थीं, वहीं दूसरी ओर शरद गुट के नेताओं का स्पष्ट कहना था कि शरद पवार जैसे अनुभवी राजनेता और सुप्रिया सुले जैसी सांसद सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में काम करने के लिए तैयार नहीं हैं। वैचारिक और नेतृत्व संबंधी इन गहराते मतभेदों के कारण दोनों गुटों का विलय नामुमकिन हो गया।

गठबंधन का ‘सीट शेयरिंग’ और अन्य शर्तें

बीजेपी और महायुति के अन्य दलों का प्रयास है कि गठबंधन में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले। इसके लिए एक नया फॉर्मूला तैयार किया गया है, जिसके तहत शरद पवार की पार्टी का एनडीए में विलय नहीं होगा। इसके बजाय, शरद गुट और एकनाथ शिंदे की शिवसेना मिलकर काम करेंगे। भविष्य में होने वाले चुनावों में दोनों दल अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों (गढ़ों) में सीट शेयरिंग के आधार पर प्रत्याशी उतारेंगे।

इस गठबंधन के पीछे एक और बड़ी शर्त की चर्चा है, जिसके अनुसार शरद पवार गुट को भविष्य में ‘परिसीमन बिल’ का समर्थन करना होगा।

सियासी समीकरण और भविष्य की चुनौतियां

जयंत पाटील और जितेंद्र आह्वाड की सीएम एकनाथ शिंदे के साथ हालिया मुलाकात इस दिशा में एक बड़ा संकेत है। विशेष रूप से जितेंद्र आह्वाड और एकनाथ शिंदे का ठाणे में धुर विरोधी होना और फिर साथ आना, महाराष्ट्र की राजनीति में ‘कुछ भी संभव है’ वाली कहावत को सच साबित करता है। यह नया गठबंधन न केवल एमवीए के लिए बड़ा झटका है, बल्कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को और अधिक जटिल बनाने वाला है। शरद पवार का यह दांव उन्हें सत्ता के केंद्र के करीब तो लाता है, लेकिन देखना यह होगा कि उनके पारंपरिक समर्थक इस फैसले को किस नजरिए से देखते हैं।

स्मार्ट क्लास रूम, प्रयोगात्मक शिक्षण व्यवस्था और आधुनिक शिक्षण संसाधनों के बारे में प्राप्त की जानकारी

2