Maharashtra News: महाराष्ट्र में विधान सभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार, 13 मार्च को धर्म स्वतंत्रता बिल 2026 विधानसभा में पेश किया गया। सरकार के अनुसार, इस बिल का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को बल, दबाव, धोखा, गलत प्रस्तुति या अन्य कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किए जाने से रोकना है। यह बिल न केवल अवैध धर्मांतरण को रोकने का प्रयास करता है, बल्कि इसे अन्य राज्यों के कानूनों की तुलना में अधिक सख्त और व्यापक बनाया गया है। इसके तहत अवैध धर्मांतरण से हुई शादी, बच्चों की अभिरक्षा और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए भी स्पष्ट प्रावधान हैं।
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धर्म स्वतंत्रता बिल 2026 के प्रमुख प्रावधान
अवैध धर्मांतरण और बच्चों का धर्म: बिल में कहा गया है कि अवैध धार्मिक धर्मांतरण से हुई शादी से पैदा हुए बच्चे को उस धर्म का माना जाएगा, जिसे उसकी मां ने ऐसी शादी या रिश्ते से पहले अपनाया था।
संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध: अवैध धर्मांतरण से संबंधित सभी अपराध संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-bailable) होंगे। इन मामलों की जांच सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के अधिकारी द्वारा की जाएगी और सुनवाई सेशन कोर्ट में होगी।
पूर्व सूचना अनिवार्य: धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को संबंधित प्राधिकारी को 60 दिन पूर्व सूचना देनी होगी। इसके बाद 30 दिनों के भीतर कोई आपत्ति दर्ज कर सकता है।
घोषणा और समयसीमा
धर्म परिवर्तन के 21 दिनों के भीतर, व्यक्ति और आयोजन करने वाली संस्था को प्राधिकारी को घोषणा पत्र जमा करना होगा। अगर निर्धारित समय पर घोषणा नहीं की गई, तो धर्म परिवर्तन को अमान्य माना जाएगा। बिल में अवैध धर्मांतरण के पीड़ितों के पुनर्वास, भरण-पोषण और बच्चों की अभिरक्षा से जुड़े सुरक्षा प्रावधान भी शामिल हैं।
सजा और जुर्माना
अवैध धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को अधिकतम 7 वर्ष की कैद और 1 से 5 लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है। अगर अपराध नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, अनुसूचित जाति/जनजाति या सामूहिक धर्मांतरण से जुड़ा हो, तो कठोर सजा का प्रावधान है। बार-बार अपराध करने वालों के लिए अधिकतम 10 वर्ष की कैद और 7 लाख रुपये तक जुर्माना निर्धारित है।
संगठनों और पदाधिकारियों पर कार्रवाई
किसी संगठन से जुड़े होकर अवैध धर्मांतरण कराने पर संगठन का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। जिम्मेदार पदाधिकारियों पर जेल और जुर्माने की कार्रवाई होगी। कानून का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं को मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता बंद कर दी जाएगी।
एफआईआर और पुलिस संज्ञान
अवैध धर्मांतरण के मामलों में एफआईआर किसी भी रिश्तेदार, माता-पिता या भाई-बहन द्वारा दर्ज कराई जा सकती है। पुलिस स्वयं भी ऐसे मामलों में संज्ञान ले सकती है। इस बिल के लागू होने के बाद महाराष्ट्र में धर्मांतरण के मामलों में कठोर निगरानी और सख्ती देखने को मिलेगी। इसका उद्देश्य केवल अवैध धर्मांतरण को रोकना नहीं बल्कि समाज में धर्म की स्वतंत्रता और सुरक्षित वातावरण बनाए रखना भी है।










