Maharashtra News: आवारा कुत्ते के काटने के बाद दहशत में था युवक, रेबीज के लक्षणों के वहम में लगा ली फांसी

कल्याण ईस्ट के तिसगांव नाका स्थित 'सहजीवन सोसायटी' में रहने वाले एक बैंक अधिकारी, ऐस विश्वनाथ अमीन ने आवारा कुत्ते के काटने के बाद उपजे डर के कारण आत्महत्या कर ली।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 24, 2026

Maharashtra News: महाराष्ट्र के कल्याण (पूर्व) में एक हृदय विदारक घटना घटी है, जिसने मानसिक स्वास्थ्य और जागरूकता की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक प्रतिष्ठित बैंक में वरिष्ठ पद पर कार्यरत युवक ने आवारा कुत्ते के काटने के बाद ‘रेबीज’ होने के डर से मौत को गले लगा लिया। मृतक की पहचान ऐस विश्वनाथ अमीन के रूप में हुई है।

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जानें क्या थी पूरी घटना

ऐस विश्वनाथ अमीन कल्याण ईस्ट के तिसगांव नाका स्थित सहजीवन सोसायटी में रहते थे। कुछ दिनों पहले जब वे बाहर थे, तब एक आवारा कुत्ते ने उनके पैर में काट लिया था। एक जिम्मेदार नागरिक की तरह ऐस ने तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया और रेबीज का इंजेक्शन (वैक्सीन) भी लगवाया था। वैक्सीन लगवाने के बावजूद, ऐस के मन में रेबीज का डर घर कर गया था। उन्हें लगातार यह लग रहा था कि उनमें रेबीज के लक्षण विकसित हो रहे हैं। पुलिस और परिजनों के अनुसार, वे इस बात से बेहद चिंतित थे कि अगर उन्हें रेबीज हो गया, तो उनके परिवार को भारी कष्ट और परेशानी झेलनी पड़ेगी। इसी मानसिक तनाव और बीमारी के डर के कारण उन्होंने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

प्रशासनिक हलचल और स्थानीय रोष

इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और स्थानीय निवासियों में आवारा कुत्तों को लेकर भारी आक्रोश है।

पार्षद की मांग: शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद महेश गायकवाड़ ने इस त्रासदी को लेकर नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर हर्षल गायकवाड़ से मुलाकात की। उन्होंने मांग की कि शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाने के लिए नगर निगम को तत्काल और सख्त कदम उठाने चाहिए।

पुलिस जांच: स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या युवक को किसी ने गलत जानकारी दी थी जिससे उसका डर इतना बढ़ गया।

चिकित्सकों का मानना है कि अगर कुत्ते के काटने के बाद समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) ले ली जाए, तो रेबीज होने का खतरा लगभग शून्य हो जाता है। ऐस ने इंजेक्शन लिया था, फिर भी डर के कारण सुसाइड करना यह दर्शाता है कि समाज में बीमारी के इलाज से ज्यादा उसके खौफ को लेकर जागरूकता फैलाने की जरूरत है।

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