Maharashtra Monkey : महाराष्ट्र में बंदरों को पकड़ने पर मिलेंगे 600 रुपये, सरकार ने किया इनाम दोगुना

महाराष्ट्र के कोंकण और पश्चिमी क्षेत्रों में बंदरों के बढ़ते उत्पात को देखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब एक बंदर को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ने पर 600 रुपये मिलेंगे। क्या सरकार का यह कदम किसानों की फसलों और आम जनता को बंदरों के हमलों से बचा पाएगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 27, 2026

Maharashtra Monkey : महाराष्ट्र के शहरी और ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ वर्षों से इंसानों और बंदरों के बीच संघर्ष की घटनाएं चिंताजनक रूप से बढ़ी हैं। इस गंभीर होती समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बेहद दिलचस्प और व्यावहारिक योजना की शुरुआत की है। अब राज्य का कोई भी नागरिक यदि किसी उत्पाती बंदर को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उसे उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ता है, तो सरकार उसे प्रति बंदर 600 रुपये का नकद पुरस्कार देगी। यह कदम केवल बंदरों को आबादी से दूर करने के लिए नहीं, बल्कि वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच एक सुरक्षित संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

क्यों बढ़ी बंदरों की आक्रामकता? वन विभाग ने बताई असली वजह

वन विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि बंदरों के व्यवहार में आए इस बदलाव और बढ़ते हमलों के पीछे मानवीय हस्तक्षेप एक बड़ा कारण है। अक्सर लोग धार्मिक आस्था या मनोरंजन के वश में होकर बंदरों को खुलेआम खाना खिलाते हैं। इस वजह से बंदरों को आसानी से भोजन मिलने की आदत हो जाती है और वे प्राकृतिक रूप से शिकार करना या फल-कंद ढूंढना छोड़ देते हैं। जब कभी उन्हें आसानी से भोजन मिलना बंद हो जाता है, तो वे आक्रामक होकर घरों, दुकानों और खेतों पर हमला करने लगते हैं। शहरों के विस्तार और जंगलों के कटने से उनके रहने की जगह कम हो गई है, जिससे वे मजबूरी में रिहाइशी इलाकों का रुख कर रहे हैं।

फसलों की बर्बादी और सार्वजनिक सुरक्षा पर सरकार का कड़ा रुख

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बंदरों के आतंक से सबसे ज्यादा परेशान हैं। बंदरों के झुंड मिनटों में तैयार फसलों को तहस-नहस कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं शहरों में, सार्वजनिक पार्कों, रेलवे स्टेशनों और छतों पर बंदरों का कब्जा होने लगा है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में दहशत बनी रहती है। सरकार का मानना है कि महज बंदरों को डराकर भगाना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। इसलिए, उन्हें वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से पकड़कर घने जंगलों में पुनर्स्थापित करना अनिवार्य हो गया है, ताकि वे अपने प्राकृतिक वातावरण में वापस लौट सकें।

पुरानी राशि में भारी बढ़ोतरी: 300 से बढ़ाकर किए गए 600 रुपये

उल्लेखनीय है कि बंदरों को पकड़ने के लिए प्रोत्साहन राशि पहले से ही दी जा रही थी, लेकिन वह बेहद कम थी। इससे पहले एक बंदर को पकड़ने पर सरकार मात्र 300 रुपये का भुगतान करती थी। कम राशि होने के कारण लोग इस जोखिम भरे काम में रुचि नहीं ले रहे थे। अब राज्य सरकार ने इस राशि को दोगुना कर 600 रुपये कर दिया है। सरकार को उम्मीद है कि इनाम की राशि बढ़ने से स्थानीय लोग और पेशेवर लोग इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। इससे न केवल बंदरों की आबादी पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के छोटे अवसर भी पैदा होंगे।

22 अप्रैल से नई नियमावली लागू: स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा का विशेष ध्यान

राजस्व और वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह नई योजना 22 अप्रैल 2026 से पूरे महाराष्ट्र में प्रभावी हो गई है। योजना के तहत पकड़े गए हर बंदर का सबसे पहले पशु चिकित्सकों द्वारा ‘हेल्थ चेकअप’ किया जाएगा। यदि बंदर बीमार या चोटिल है, तो उसका उपचार किया जाएगा और स्वस्थ होने के बाद ही उसे मानव बस्तियों से कोसों दूर घने जंगलों में छोड़ा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की कड़ी निगरानी वन विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जानवरों के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता न हो और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

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