BMC Election Result: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही मुंबई नगर निगम (BMC) पर पिछले ढाई दशकों से चला आ रहा उद्धव ठाकरे गुट का वर्चस्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। चुनाव परिणामों ने राज्य की सियासी दिशा को नई धार दे दी है, जहां सत्ताधारी गठबंधन ने अपनी पकड़ मजबूत की है, वहीं विपक्षी खेमे में भारी निराशा का माहौल है।
BMC Results: मुंबई BMC में सत्ता परिवर्तन, BJP की ऐतिहासिक जीत, ठाकरे भाइयों को झटका
बीएमसी चुनाव परिणाम
बताते चले कि, मुंबई नगर निगम की 227 सीटों के लिए आए नतीजों ने सबको चौंका दिया है। इस चुनाव में बीजेपी ने 89 सीटों पर जीत हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में खुद को स्थापित किया, जबकि उनके सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। कुल मिलाकर, इस गठबंधन ने 118 सीटों का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे अब बीएमसी में बीजेपी गठबंधन का मेयर बनना तय हो गया है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को केवल 72 सीटों से संतोष करना पड़ा, जो उनकी अब तक की सबसे बड़ी हार मानी जा रही है।
संजय राउत का तीखा हमला
आपको बता दे कि, चुनाव परिणामों के बाद शिवसेना (UBT) के दिग्गज नेता और सांसद संजय राउत का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा प्रहार किया। राउत ने शिंदे की तुलना ऐतिहासिक पात्र ‘जयचंद’ से की, जिन्हें विश्वासघात का प्रतीक माना जाता है। राउत ने भावुक होते हुए लिखा कि आज अगर मुंबई का मेयर पद शिवसेना के हाथ से निकलकर बीजेपी के पास जा रहा है, तो इसके जिम्मेदार सिर्फ शिंदे और उनकी बगावत है।
संजय राउत की सोशल मीडिया पोस्ट
संजय राउत ने अपने पोस्ट में मराठी जनता की भावनाओं को उभारने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, “अगर एकनाथ शिंदे शिवसेना के साथ गद्दारी न करते, तो मुंबई में कभी भी बीजेपी का मेयर नहीं बन सकता था।” राउत ने आगे चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मराठी मानुष शिंदे को हमेशा एक ‘जयचंद’ के रूप में ही याद रखेगा। यह बयान उस पुरानी टीस को दर्शाता है जो 2022 में हुई पार्टी की टूट के बाद से उद्धव गुट के नेताओं के मन में है। राउत ने स्पष्ट किया कि 1997 से 2022 तक बीएमसी पर जो कब्जा था, उसे अपनों की गद्दारी ने ही खत्म किया है।
क्या उद्धव गुट कर पाएगा वापसी?
यह हार उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है। याद दिला दें कि साल 2022 में एकनाथ शिंदे ने 39 विधायकों के साथ मिलकर उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह किया था, जिसके कारण महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी। तब से दोनों गुटों के बीच ‘असली शिवसेना’ की जंग जारी है। निकाय चुनावों के इन नतीजों ने साबित कर दिया है कि शिंदे और बीजेपी का गठबंधन धरातल पर मजबूत हो रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या संजय राउत के ‘गद्दार’ और ‘देशद्रोही’ जैसे संबोधन जनता के बीच उद्धव गुट को दोबारा सहानुभूति दिला पाएंगे या राज्य की राजनीति में शिंदे-बीजेपी का यह विजय रथ आगे भी जारी रहेगा।










