Mahanadi Water Dispute : महानदी विवाद पर निकलेगा समाधान, साय के बयान से बढ़ी दोनों राज्यों की उम्मीद

ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने की कोशिशों ने नया मोड़ लिया है। अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद दोनों राज्यों ने बातचीत और तकनीकी आकलन के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए। सीएम विष्णुदेव साय ने दोनों राज्यों के हित सुरक्षित रखने पर जोर दिया।

Mahanadi Water Dispute

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 2, 2026

Mahanadi Water Dispute : छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने की दिशा में गुरुवार को नई दिल्ली में अहम पहल हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखा। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के चेयरमैन, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

दो राज्यों के हितों पर जोर

बैठक के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महानदी केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा की साझा विरासत है। उन्होंने कहा कि विवाद का समाधान ऐसा होना चाहिए, जिसमें दोनों राज्यों के हित सुरक्षित रहें। छत्तीसगढ़ वैज्ञानिक, न्यायसंगत, पारदर्शी और दीर्घकालिक समाधान के पक्ष में है, ताकि किसानों, आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों की पानी संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखा जा सके।

Mahanadi Water Dispute
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महानदी के उद्गम क्षेत्र को लेकर छत्तीसगढ़ का पक्ष

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में होता है और नदी के स्रोत क्षेत्र का बड़ा हिस्सा भी राज्य में स्थित है। इसलिए समाधान तैयार करते समय छत्तीसगढ़ के किसानों, सिंचाई परियोजनाओं और आदिवासी क्षेत्रों की जल जरूरतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की आवश्यकताओं को समझता है और उसके हितों का सम्मान करता है।

हीराकुड बांध की अहमियत भी स्वीकार

साय ने ओडिशा के लिए हीराकुड बांध की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग की भावना बनाए रखते हुए महानदी के जल संसाधनों का संतुलित और वैज्ञानिक इस्तेमाल सुनिश्चित करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महानदी को विवाद का कारण बनाने के बजाय इसे दोनों राज्यों के बीच सहयोग, विकास और आपसी भरोसे का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर समाधान की उम्मीद

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की पहल, दोनों राज्यों के बीच निरंतर बातचीत और केंद्रीय जल आयोग के वैज्ञानिक आकलन के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। उनके मुताबिक, पानी की उपलब्धता, सिंचाई, पेयजल और भविष्य की जरूरतों से जुड़े आंकड़ों का निष्पक्ष अध्ययन विवाद के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अमित शाह की पहल का किया स्वागत

मुख्यमंत्री साय ने अमित शाह की पहल की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से चले आ रहे अंतरराज्यीय विवादों को बातचीत और सहमति के जरिए सुलझाना संघवाद को मजबूत देती हैं। शाह ने कहा कि महानदी विवाद प्रशासनिक या तकनीकी मुद्दा नहीं , इसके समाधान से दोनों राज्यों के बीच विश्वास और साझेदारी भी मजबूत हो सकती है।

बस्तर मॉडल का भी दिया उदाहरण

साय ने महानदी विवाद के समाधान के संदर्भ में बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए अभियान का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत इच्छाशक्ति, बेहतर समन्वय और लगातार प्रयासों से मुश्किल परिस्थितियों को बदला जा सकता है। इसी सकारात्मक सोच और प्रतिबद्धता के साथ दोनों राज्य मिलकर महानदी विवाद का समाधान खोज सकते हैं।

साझा विरासत से मजबूत हो सकते हैं रिश्ते

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का हवाला देते हुए साय ने दोनों राज्यों के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की साझा विरासत और दोनों राज्यों के बीच सदियों पुराने संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि यही साझा विरासत बातचीत और सहयोग के रास्ते को मजबूत कर सकती है।

2018 से ट्रिब्यूनल में लंबित है मामला

महानदी जल बंटवारे का विवाद वर्ष 2018 से महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है। पिछले कुछ समय से दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक और तकनीकी स्तर पर बातचीत तेज हुई है। पिछले महीने भुवनेश्वर में हुई बैठक के दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों ने बातचीत के जरिए विवाद का समाधान खोजने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।

तकनीकी और राजनीतिक बातचीत रहेगी जारी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यदि केंद्रीय जल आयोग के तकनीकी आकलन और दोनों राज्यों के बीच बातचीत से कोई व्यावहारिक एवं संतुलित समाधान सामने आता है, तो छत्तीसगढ़ सकारात्मक सहयोग करेगा। बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अब दोनों राज्यों के बीच तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर बातचीत आगे जारी रहने की उम्मीद है।

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