UP Election 2027: यूपी में विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछ चुकी है। इस सियासी समर को जीतने के लिए सभी राजनीतिक दल तमाम तरह की राजनीतिक रणनीतियों को बनाने में जुटे हुए हैं। सियासी साझेदारी के तमाम गणित बनाये जा रहे है तो जातीय खेमेबंदी भी शुरू हो गई है।
2027 में नया सियासी वोट बैंक

यह तो हर चुनाव में होता आया है लेकिन 2027 के चुनाव में जातीय व मजहबी वोट बैंक के अलावा एक नया वोट बैंक भी उभर कर सामने आया है। ये है युवाओं का वोट बैंक। सभी राजनीतिक दल इस वोट बैंक को अपने पाले में करने की जुगत में लगे हुए है। जोश से लबरेज और अपनी ही दुनिया में रहने वाला इस युवा वोट बैंक को साधना भाजपा के लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबब है। कारण बेहद दिलचस्प है।
युवा वोट पर सियासी नजर

2027 में 18 से 22 साल की उम्र के लाखों युवा ऐसे होंगे, जो अखिलेश यादव की 2012 से 2017 वाली सरकार के समय या तो बहुत छोटे थे या स्कूल में पढ़ रहे थे। उनमें से बड़ी संख्या ने उस दौर की राजनीति को मतदाता की नजर से देखा ही नहीं। यानी भाजपा पिछले कई चुनावों में जिस पुराने राजनीतिक नैरेटिव 2012-17 के दौरान कानून-व्यवस्था और शासन को लेकर सपा पर हमले के लिए इस्तेमाल करती रही है, नई पीढ़ी के लिए उसकी याददाश्त में नहीं है। अब भाजपा नई पीढ़ी की इस याददाश्त को ताजा करने की तैयारी कर रही है।
कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पहुंचेगी BJP

इसके लिए भाजपा का युवा मोर्चा उत्तर प्रदेश में कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक पहुंचने के लिए ‘सार्थक युवा संवाद’ नाम से एक अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसमें युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं से भाजपा सांसद, विधायक और एमएलसी संवाद करेंगे। भाजपा युवा मोर्चा का प्रस्तावित अभियान सामान्य बड़ी रैलियों से थोड़ा अलग रखने की तैयारी है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक पार्टी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में युवाओं के साथ सीधे संवाद करेगी। भाजपा के सांसद, विधायक और एमएलसी इन कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं। पार्टी जिन मुद्दों पर तुलना पेश करना चाहती है उनमें कानून-व्यवस्था, अपराध, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सौहार्द शामिल हैं।
युवाओं के बीच BJP का बड़ा नैरेटिव प्लान

इसके साथ ही सपा की सरकार को जंगलराज साबित करने के लिए एनसीआरबी व अन्य दूसरे आधिकारिक आंकडे़ भी युवाओं के सामने रखे जायेंगे। एक तरफ भाजपा यह बताएगी कि उसके मुताबिक 2012-17 और 2017 के बाद के शासन में क्या अंतर रहा। दूसरी तरफ मौजूदा सरकार को लेकर युवाओं की नाराजगी, रोजगार, शिक्षा और दूसरे मुद्दों पर फीडबैक लेने की भी तैयारी है। इसके साथ ही बेरोजगारी को लेकर युवाओं में बढी नाराजगी को कम करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से अगले छह महीने में एक लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां देने के वादे को भी जोर-शोर से बताया जायेगा।
2027 में युवा वोटर लिखेंगे नई सियासी कहानी

यही वजह है कि भाजपा का प्रस्तावित ‘सार्थक युवा संवाद’ सिर्फ एक प्रचार कार्यक्रम नहीं बल्कि 2027 की बड़ी चुनावी लड़ाई के एक नए मोर्चे का संकेत है। इस बार मुकाबला केवल योगी बनाम अखिलेश नहीं होगा। एक तरफ होगी 2012-17 की राजनीतिक याद, दूसरी तरफ 2017-27 का व्यक्तिगत अनुभव और बीच में खड़ा होगा वह युवा मतदाता जो पहली बार यूपी की सरकार चुनने जा रहा है। 2027 में यही नई पीढ़ी तय करेगी कि वह पुरानी कहानी सुनती है या अपने वर्तमान अनुभव को ज्यादा महत्व देती है।










